आज के इस आधुनिक युग में हर चीज़ का आधुनिकीकरण हो रहा है। इस्तेमाल किए जाने वाले गैजेट्स से लेकर रहने के लिए भवनों तक को भी आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। हालांकि भवनों के आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया में पुरानी इमारतों को गिराया भी जा रहा है, ऐसे में उसके मलबे को ठिकाने लगाने की समस्या उत्पन हो जाती है।

वैज्ञानिकों ने पुरानी इमारतों के मलबे और भवन निर्माण के लिए बढ़ते संसाधनों की मांग का एक बेहतरीन विकल्प निकाला है। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की का दावा है कि, उन्होंने एक ऐसी तकनीकी ईज़ाद की है जिसकी मदद से पुराने भवनों के मलबे को नए भवन निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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कंक्रीट मलबे की समस्या का होगा समाधान!

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इस प्रक्रिया को कंक्रीट अपशिष्ट रीसाइकल्ड एग्रीगेट (Recycled materials for aggregates (R.A) के नाम से जाना जाता है। यदि वैज्ञानिकों की यह तकनीक कारगर साबित हुई तो पुराने भवनों के मलबे को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, इससे भविष्य में मलबे की समस्या और नए भवनों के निर्माण के लिए बढ़ते कच्चे माल की मांगों की समस्या का भी समाधान हो जाएगा।

पिछले पांच सालों से इस प्रोजेक्ट पर चल रहा था काम!

संस्थान के एनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंड क्ले प्रोडेक्टस ग्रुप के मुख्य वैज्ञानिक एवं ग्रुप लीडर वैज्ञानिक “डॉ. एके मिनोचा” के अनुसार वर्तमान में दिल्ली के बुराड़ी और शास्त्री पार्क में “कंस्ट्रक्शन एंड डेमोलिशन” (Construction and Demolition (C&D)) प्लांट मौजूद है। उन्होंने बताया कि डेवलेपमेंट ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी की तरफ से दिए गए इस प्रोजेक्ट के लिए उनकी टीम पिछले पांच सालों से काम कर रही थी।

बनाया जाएगा डेमो हाऊस!

खबरों की माने तो जल्द ही इस तकनीक का इस्तेमाल कर एक डेमो हाऊस का निर्माण किया जाएगा। हालांकि इसके लिए हाऊसिंग एण्ड अर्बन डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन के अनुमति की आवश्यकता है और इस प्रक्रिया के लिए उनसे बात-चीत चल रही है।

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