भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह हॉकी की दुनिया का वो चर्चित सितारा है, जिन्होंने मौत से संघर्ष करके हॉकी के मैदान में फिर से वापसी की। मैदान पर विरुद्ध टीम के छक्के छुड़ाने वाले संदीप सिंह को दुनिया का सबसे फ़ास्ट “ड्रैग फ्लिकर” भी कहा जाता है। संदीप सिंह के ड्रैग की रफ़्तार 145 किमी प्रति घंटा है, जिस कारण उन्हें “फ़्लिकर सिंह ” के नाम से भी जाना जाता है।

when you’ve got something to prove, there’s nothing greater than a challenge.

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बचपन से ही हॉकी में रूचि रखने वाले संदीप सिंह का जन्म हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुआ। भारत के लिए खेलना उनका सपना था। उनके इस सपने का सफर 2004 में कुआलालम्पुर के अज़लान शाह कप से हुआ, जहाँ उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन 2006 में उनके साथ हुई एक अकस्मात घटना ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया।

जर्मनी में विश्व कप खेलने से दो दिन पहले, शताब्दी ट्रेन में सफर के दौरान, गलती से एक व्यक्ति की गोली संदीप के पेट में लगी, जिससे किडनी और लिवर बेकार हो गए और स्पाइनल कॉर्ड को भी नुकसान पंहुचा। डॉक्टर ने भी यह घोषित कर दिया कि वो अब कभी खेल नहीं पाएंगे। इस हादसे के बाद उनका करियर जैसे समाप्त ही हो गया था। इन सबके बावजुद संदीप ने हार न मानते हुए सारी बाधाओं को मात दी और जिंदगी से जंग लड़कर फिर से अपने क्षेत्र में वापसी की।

अपनी बेहतरीन परफॉर्मन्स की बदौलत, 2009 में, वे भारतीय हॉकी टीम के कप्तान चुने गए, और 13 साल बाद भारत को अज़लान शाह कप जीत कर दिलाया। संदीप 2012 में ओलम्पिक में खेले और क्वालीफायर मैच में सबसे ज्यादा, 16 गोल किये।

जयपुर के वैक्स संग्रहालय में संदीप सिंह का मोम पुतला बना है। यह उपलब्धि प्राप्त करने वाले संदीप हॉकी के संभवतः पहले खिलाडी है। संदीप सिंह की कहानी इतनी प्रेरणादायक है कि उनपर “सुरमा” नामक एक फिल्म बनने जा रही है, जिसमे दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका निभाने वाले है।

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