महिला मुक्केबाज़ी में धमाल मचाने वाली मेरी कॉम (Mary Kom) का आज 34वां जन्मदिन है| मेरी कॉम एक ऐसी मशहूर हस्ती हैं जिन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। महिला मुक्केबाजी में मेरीकॉम की प्रतिभा को भारत ही नहीं, पूरी दुनिया मान चुकी है। मेरी कॉम ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा का अमीरी और गरीबी से कोई संबंध नहीं होता। कुछ करने का जज़्बा होना चाहिए बस फ़िर तो सफलता आपके कदम चूमने लगती है। मेरी कॉम ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी महिला की ज़िन्दगी केवल उसके बच्चों या घर-गृहस्थी तक ही सीमित नहीं रहती है बल्कि उन्हें अपने सपनों को पूरा कर दिखाने का भी पूरा अधिकार है।

मेरी कॉम का पूरा नाम मैंगते चंग्नेइजैंग मेरी कॉम (Hmangte Chungneijang Mary Kom) है। वे भारत की पहली महिला मुक्केबाज़ (बॉक्सर) हैं जिन्होंने महिला मुक्केबाजी में भारत को एक खासी पहचान दिलाई है। उनका जन्म मार्च 1, 1983 को मणिपुर के छोटे से स्थान कांगथेई ( Kangthei) के अत्यन्त गरीब परिवार में हुआ था। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मेरी कॉम के लिए खेलों में अपनी रुचि के आधार पर इस क्षेत्र में प्रोफेशनल ट्रेनिंग (Professional Training) और उपलब्धियों का सपना देखना कठिन था, पर जहाँ चाह हो, वहाँ राह निकल ही आती है।

To be a champion,you have to believe in yourself when no one else will.

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मेरी कॉम की ट्रेनिंग तीन कोचों द्वारा की गई थी—इबोम्चा (Ibomcha), नरजीत (Narjeet) एवं किशन (Kishan)। मेरी कॉम की रोल मॉडल लैला अली थीं। मेरी ने जल्दी अपने खेल की बारीकियां सीख लीं और अपनी आशा और अपने कोचों की उम्मीद से बढ़कर कठिन से कठिन प्रशिक्षण प्राप्त करके निपुणता हासिल कर ली। वर्ष 2000 में मेरी ने राज्य चैंपियनशिप महिला बॉक्सिंग में विजय प्राप्त की और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी “किलर इस्टिंक्ट” (Killer Instinct) के कारण वह एक के बाद एक पदक जीतती रहीं।

Hardwork beats talent,when talent doesn’t work hard.

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अपनी शादी के बाद, मेरी कॉम ने मुक्केबाजी से थोड़े समय के लिए दूरी बना ली थी और फ़िर अपने जुड़वा बच्चों के जन्म के कुछ समय बाद उन्होंने फिर से प्रशिक्षण शुरू कर दिया था। उनके पति ने उनके मुक्केबाजी के प्रति प्यार और लगन को देखते हुए उन्हें काफी सहयोग दिया था।

When life gets tough put on your boxing gloves.

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मेरी कॉम ने 2000 से 2005 तक राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया है । उन्होंने दूसरी एशियाई महिला चैंपियनशिप हिसार में स्वर्ण पदक जीता था। मेरी ने तीसरी महिला एशियाई चैंपियनशिप ताइवान (Taiwan) में भी विजय प्राप्त कर स्वर्ण पदक प्राप्त किया। मेरी कॉम ने विश्व स्तर पर महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भी विजय पाई है और भारत का मान बढ़ाया है । वह तीन बार विश्व चैंपियन बन चुकी हैं। इसके अतिरिक्त पहली विश्व महिला बाक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक प्राप्त किया था। उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है । 2007 में उनका नाम राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड के लिए भी नामांकित किया गया था।

Work hard in silence;Let success be your noise.

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उनके जीवन पर एक फिल्म भी बन चुकी है जिसका प्रदर्शन 2014 मे हुआ था। इस फिल्म में उनकी भूमिका प्रियंका चोपड़ा ने निभाई थी। आइए हम मेरी कॉम द्वारा कही गई कुछ बातों पर नज़र डालते हैं:

1. यदि मैं दो बच्चों की माँ होकर भी मेडल जीत सकती हूँ, तो आप सब भी ऐसा कर सकते हैं। आप मुझे एक उदाहरण के तौर पर लें और कभी भी हार ना मानें।

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2. बॉक्सिंग से यह तो साबित हो गया है कि महिलाएँ, पुरुषो से किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं।

3. मैं कभी भी केवल अपनी ताकत या तकनीक पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि अपने दिमाग और मन की शक्ति पर भी भरोसा करती हूँ।

If it doesn’t Challenge You, It Won’t Change You … 🙂

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4.  हर औरत अपने जीवन में कुछ भी कर सकती हैं, चाहे उन्हें मौका मिले ना मिले और कोई सहारा दे या न दे फिर भी।

Never stop trying;never stop believing;never giveup;your day will come!!

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5. मैं उम्मीद करती हूँ कि यदि पूर्वोत्तर के लोगों द्वारा देश के लिए मेडल जीते जाने से उनके प्रति नस्लीय भेदभाव कम होगा।

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