एंजलिना अरोड़ा अपने स्थानीय मछली और चिप्स की दुकान पर बैठकर मछलियों के निकाले गए कचरे को देख रही थी। केकड़े का ढाचा, झींगे की पूंछ और मछलियों का सिर। इसके बहुत से ढ़ेर कचरे के लिए एकत्रित हो  रहे थे।

15 साल की उभरती युवा वैज्ञानिक ने सोचा कि इसका कोई बेहतर तरीका होना चाहिए था।

तो उन्हें कुछ किलो निकाले गए सीप मिल गए, जिसे वह सिडनी स्थित गर्ल्स हाई स्कूल के साइंस लैब में ले गई, और इस पर प्रयोग करना शुरु कर दिया।

आखिरकार, उन्हें एक हल्का, मजबूत और बायोडिग्रेडबल प्लास्टिक बनाने का तरीका मिल गया।

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10 साल की स्कूल जाने वाली लड़की एक दिन इसे ऑस्ट्रेलियाभर के सुपर मार्केट में प्लास्टिक बैग के तौर पर इस्तेमाल होता देखना चाहती है।

उनका कहना है कि, “मेरा सपना है कि इस दुनिया का प्रत्येक प्लास्टिक का टुकड़ा मेरी प्लास्टक का बना हो।”

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साल 2016 में NSW युवा वैज्ञानिक पुरस्कार के आयु वर्ग में एंजलीना को एक अन्य प्लास्टिक, जोकि कॉर्न स्टार्च से बना हुआ था उसके लिए रसायन विज्ञान में पहला पुरस्कार मिला।

कॉर्नस्टार्च से बना हुआ प्लास्टिक पानी के संपर्क में आते ही फट जाता है–जो इसे बहुत बायोडिग्रेडेबल बनाता है, लेकिन पूरी तरह से अव्यवहारिक भी।

हालांकि, जीत ने CSIRO के विभिन्न वैज्ञानिकों परिचय करवाया जो उनके वर्तमान परियोजनाओं पर उनको सलाह देते हैं।

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