भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अपने नए-नए खोज और नई तकनीक के लिए विश्व भर में मशहूर है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष यहां देश-विदेश की कई सारी कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आती हैं और करोड़ों का पैकेज देकर विद्यार्थियों को अपनी कंपनी में शामिल करती हैं। हाल ही में आईआईटी कानपुर ने भारतीय सेना के लिए एक ऐसा आविष्कार किया है जो उन्हें किसी भी प्रकार के रडार से बचने में सहायता करेगा।

 

बेटर इंडिया के अनुसार, आईआईटी कानपुर ने एक ऐसा मेटेरियल बनाया है जिसको पहनने से और अपने लडा़कू वाहनों को उससे ढंक देने के बाद किसी भी प्रकार का सेंसर उन्हें नहीं पकड़ पाएगा। इस मेटेरियल का प्रयोग करके किसी भी प्रकार के रडार, मोशन-डिटेक्टिंग ग्राउंड सेंसर और थर्मल इमेजिंग सिस्टम के नजर में आने से बचा जा सकता है।

भारत की रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है और उसकी फंडिंग भी कर रही है । इस परियोजना को पूरा किया इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. कुमार वैभव श्रीवास्तव और मैकेनिकल इंजिनिरिंग विभाग के. जे. रामुकमार।

दोनों प्रोफेसर इस पर वर्ष 2010 से काम कर रहे हैं। अब इसकी फील्ड टेस्टिंग बाकी है। यह मैटेरियल बेहद लचीला है और किसी भी मौसम में काम कर सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरी तरह से स्वदेशी है और अब इस पर एक कदम आगे काम करते हुए इसे एयरक्राफ्ट में भी इस्तेमाल किये जाने लायक बनाया जा रहा है।

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