आसमान में टिमटिमाते अमुमन हर तारों का कम से कम एक ग्रह ज़रुर होता है, जो हमारी धरती की तरह उनका चक्कर लगा रहा होता है, जिसे “एक्सो प्लानेट” कहते हैं, और ये विभिन्न आकार-प्रकार के होते हैं। हमारे सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति से लेकर अदने से दिखने वाले प्लूटो की तरह। 

नासा के एक लेख अनुसार तारों की परिक्रमा करते कुछ ग्रह हमारी धरती के आकार के भी होते हैं, कुछ इतने गर्म होते हैं कि किसी भी धातु को पिघला सकते हैं, तो कुछ बर्फ की तरह जमे हुए होते हैं। ये ग्रह अपने तारों की कक्षा के बहुत नज़दीक होते हैं और अपनी परिक्रमा बहुत ही कम समय में पूरी कर लेते हैं, इतना कि उनका पूरा साल मात्र कुछ दिनों में ही समाप्त हो जाता है। कुछ एक्सो प्लानेट तो बिना किसी तारों के ऐसे ही ब्रम्हाण्ड में चक्कर लगाते रहते हैं।

Illustration of the type of planets future telescopes, like TESS and James Webb, hope to find
Credit: NASA

नासा के अनुसार ब्रम्हाण्ड में न जाने कितने तारे हैं, शायद 400 बिलियन से भी अधिक, जिनमें हमारा सूर्य भी शामिल है। इस तरह ग्रहों या एक्सो प्लानेट की संख्या भी बहुत ज्यादा हो सकती है। पहला एक्सो प्लानेट जिसे दुनिया जानती है वह 51 Pegasi b जो कि आकार में बृहस्पति की तरह है और हद से ज्यादा गर्म, यह अपनी परिक्रमा मात्र चार दिनों में ही पूरी कर लेता है। यह 1995 का वक्त था, जब एक्सोप्लानेट के बारे में जानकारी मिली।

Movie of four planets
Credit: NASA

आज के दौर में हम एक्सो प्लानेट (Exoplanet) के ब्रम्हाण्ड में जी रहे हैं। अबतक करीब 3,700 ग्रहों की पुष्टि की जा चुकी है और इनकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। स्पेस टेलिस्कॉप की नए आविष्कार से यह काम और भी आसान हो जाएगा, और इसमें सबसे पहला है TESS की लॉन्चिंग, जो अन्य ग्रहों की तलाश करेगा। नासा के अनुसार यह अत्याधुनिक उपकरण अमुमन सभी नज़दीकी तारों का विवरण बेहद करीब से लेगा।

उम्मीद की जा रही है कि इस तलाश में कुछ ग्रह ऐसे भी मिल सकते हैं जहां जीवन संभव हो सकता है। यदि, हम भाग्यशाली रहें, तो हो सकता है इनमें से किसी पर ऑक्सीजन, कार्बनडाइऑक्साइड और मिथेन के संकेत मिल जाए, जो कि जीवन के लिए जरुरी है।

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