सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल बैटरी उपलबद्ध कराने की राह में मेलबर्न (Melbourne) के आरएमआईटी (RMIT) विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक टीम ने दुनिया की पहली री-चार्जेबल प्रोटॉन बैटरी (proton battery) का आविष्कार किया है, जिसमें लीथियम (lithium) की बजाए कार्बन (carbon) और पानी (water) का इस्तेमाल किया गया है।

यह बैटरी कार्बन उत्सर्जन नहीं करती और ज़ीरो एमिशन रिनुअल (zero-emission renewables) चीज़ों से बिजली संग्रहित कर सकती है। यह छोटी प्रोटोटाइप बैटरी, केमिकल बैटरी (chemical battery) और हाइड्रोजन फ्यूल सेल (hydrogen fuel cell) के बीच हाईब्रिड है।

 

Researchers develop world
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जब यह बैटरी चार्ज हो जाती है, इसके अंदर मौजूद पानी प्रोटॉन विकसित करने के लिए बंट जाता है, जो कि बिना हाइड्रोजन गैस उत्पन्न किए कार्बन इलेक्ट्रॉड (carbon electrodes) से जुड़ जाता है। संग्रहित ऊर्जा को प्रवाहित करने के लिए, दोबारा प्रोटॉन बनाने के लिए हाइड्रोजन आयन (hydrogen ions) इलेक्ट्रॉन एक इलेक्ट्रॉन छोड़ता है। इलेक्ट्रॉन बिजली उपलब्ध कराता है, जबकि हाइड्रोजन प्रोटॉन ऑक्सीजन के साथ मिल जाता है और फिर पानी में तब्दील हो जाता है।

 

The battery could be commercially available within 10 years
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मुख्य शोधकर्ता, प्रोफेसर जॉन एंड्रियुज़ (John Andrews) के अनुसार, यह बैटरी पांच से दस सालों में व्यवसायिक रुप से इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी।

According to lead researcher Professor John Andrews, the battery could be commercially available within five to 10 years.

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