यह लखनऊ के छात्रों के लिए सबसे ख़ुशी का पल था। यहाँ के 550 बच्चों ने एक साथ भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ-2018) में केले से डीएनए अलग करने का प्रयोग कर नया गिनीज रिकॉर्ड बनाया। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के छात्रों ने (13 से 17 वर्ष) विज्ञान और प्राद्यौगिकी मंत्रालय के प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षाविद की उपस्थिति में यह कारनामा कर दिखाया। इन बच्चों ने अपने प्रयोग के स्पष्टीकरण के लिए 61 मिनट का समय लिया। 

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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक ऋषिनाथ ने एनबीआरआई के निदेशक प्रोफेसर एस.के.बराक और बायोटेक पार्क के सीईओ प्रमोद टंडन की पुष्टि के बाद प्रमाणपत्र जारी किए। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश पर 550 छात्रों ने सफलतापूर्वक कार्य पूरा होने की पुष्टि की।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के निर्णायक ऋषिनाथ ने प्रमाणपत्र जारी करते हुए कहा, “इससे पहले फरवरी 8, 2017 को यूएसए के वाशिंगटन, सिएटल में सिएटल चिल्ड्रन रिसर्च इंस्टीट्यूट में 302 बच्चों द्वारा यह रिकॉर्ड बनाया गया था, लेकिन लखनऊ के छात्रों ने यह रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास रच दिया।”

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जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष सर्वेश गोयल ने इस उपलब्धि के लिए छात्रों, शिक्षकों और प्रिंसिपल रवीन पाण्डे को इसका श्रेय दिया। भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, रेणु स्वरुप ने प्रयोग शुरू करने से कुछ मिनट पहले प्रतिभागियों के स्थल का दौरा किया। और उनका मनोबल बढ़ाया उन्होंने कहा, “लखनऊ के विज्ञानं क्षेत्र में यह रिकॉर्ड बहुत ही गर्व का क्षण होगा।”

“छात्रों ने इस गतिविधि के दौरान बहुत जिज्ञासा और उत्साह दिखाया। इस गतिविधि का उद्देश्य छात्रों को सार्थक सीख का अनुभव देना था और उनके विषय से संबधित ज्ञान को सुधारना था। उन्होंने आगे कहा, इस प्रयोग को सफल बनाने के लिए छात्र बेहद उत्साहित थे। “

कक्षा 8 के शिखर वर्मा ने कहा, “इस रिकॉर्ड बनानेवाली टीम का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत ही सम्मान की बात है। मैं अब गर्व से अपने दोस्तों और परिवार वालों से कह सकता हूँ कि मैं गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का हिस्सा हूँ।”

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इस स्तर के प्रयोग करने के लिए पूर्वभ्यास आवश्यक है इसलिए अक्टूबर 4 को स्कूल में एक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया था जिसमें बच्चों को केले से डीएनए अलग करने का प्रशिक्षण दिया गया था। 

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