समय-समय पर इतिहास में झांकिए तब आपको पता चलेगा कि वर्तमान का फायदा भविष्य के लिए कितना बड़ा नुकसानदेह बन सकता है। फिर बात चाहे श्रीलंका की हो जिसपर चीन से लिया गया कर्ज इतना ज्यादा बढ़ गया है जिसे चुकाना उनके लिए लोहे के चने चबाने जैसा है या फिर मालदीव की लें, जिसके बारे में हालिया रिपोर्ट से पता चला है कि उस पर चीन का इतना कर्ज है कि मालदीव में रहने वाले हर नागरिक पर 6 लाख से ज्यादा की रकम है।

लेकिन आज हम बात करेंगे रूस के द्वारा सन् 1867 में अमेरिका को बेचे गए अलास्का के बारे में जो उस वक्त तो उनके लिए फायदे का सौदा जान पड़ा लेकिन अब उन्हें इस सौदे में सिर्फ नुकसान ही नुकसान नजर आ रहा है।

 

1867 में रूस के ज़ार ने 7.2 मिलियन डॉलर में अलास्का को यूएसए के हाथों बेच दिया। इसका कारण था कि रूस के पूर्वी भाग में बेहद ज्यादा ठंड थी जिसके कारण उस भाग में कोई आधारित संरचना नहीं थी। अतः रूस के लिए अलास्का को उपयोग में लाना मुश्किल था। हालांकि, अलास्का रूस के उन क्षेत्रों से काफी दूर भी था जहाँ जीवन-यापन चलता था, अतः रूस के ज़ार ने उस भाग को अमेरिका के हाथों बेचने का निर्णय लिया।

हालांकि, यूएसए को यह सौदा पसंद नहीं आया क्योंकि वह उस वक्त खुद देश की आंतरिक समस्याओं को हल करने में लगा था लेकिन इसके बावजूद यूएसए के स्टेट्स ऑफ सेक्रेटरी ने उसे खरीद लिया क्योंकि उन्हें भविष्य में इससे होते फायदे दिखे । सन् 1867 में अलास्का रूस से अलग होकर अमेरिका में शामिल हो गया।

 

हालांकि, तीन दशकों तक यूएसए ने अलास्का में किसी तरह का निवेश नहीं किया लेकिन सन् 1896 में उन्हें अलास्का में सोने की खदानों के होने का पता चला जिसके बाद यूएस ने अपना ध्यान इस ओर केंद्रित किया। अंततः यूएस ने 1959 में अलास्का को खुद में शामिल कर अपना एक राज्य घोषित कर दिया।

एक जार के द्वारा वर्तमान को बेहतर बनाने के लिए किया गया कार्य आज रूस के लिए कितना बड़ा नुकसान है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अलास्का तो रूस के हाथ से गया ही साथ ही जो देश पूरे साल बर्फबारी की मार झेलता है उसके हाथ से एक वॉर्म पोर्ट अर्थात गर्म बंदरगाह भी छिन गया। वॉर्म पोर्ट ऐसे पोर्ट होते हैं जहाँ किसी भी देश के साल के 12 महीने जहाज आ जा सकते हैं। और दूसरे देशों से व्यापार कर सकते हैं। इसके साथ ही ऐसे पोर्ट नेवी ऑपरेशनस के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

रूस के पास एक तो पहले से ही ऐसे बंदगराहों की कमी थी, अलास्का को अमेरिका के हाथों बेचने के बाद अब उनको बहुत बड़ी हानि का सामना करना पड़ा रहा है। अगर आप दुनिया के दस सबसे बड़े इकॉनमिक की बात करें (जीडीपी के नजरिए से) तो रूस टॉप दस में शामिल नहीं है।

इसके अलावा अलास्का को अमेरिका के हाथों बेचना रूस के लिए और कई नजरिए से घाटे का सौदा रहा। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अलास्का ने यूएस के लिए एक महत्वपूर्ण रोल भी निभाया था। अतः अगर इतिहास को पलटकर देखा जाए तो यह हमें बताता है कि हो सकता है वर्तमान में जो कार्य हम तत्काल फायदे के लिए कर रहे हैं वो भविष्य में हमारे लिए बहुत बड़ा नुकसान हो।

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