अपनी गोद में अपने गिटार को संतुलित कर और उसे अपनी बांह के नीचे दबाकर, बजाने के लिए तैयार, निमेंजा रेबिक थोड़ा-सा रुके और दर्शकों की ओर जब उन्होंने रुख किया तब उनकी आंखों में एक प्रकार की उदासी दिखी जो पोलैंड के नेशनल फोरम ऑफ म्यूजिक की स्पॉटलाइट ने भी कैद किया।

सैकड़ों दर्शकों के सामने, रेबिक ने अपना सिर थोड़ा-सा झुकाया। उन्होंने कहा,”प्राचीन चीनी संस्कृति ही मेरा सबसे बड़ा जुनून है,” उन्होंने गंभीर भाव से आगे कहा, “दुर्भाग्य से यह संस्कृति चीन में लगभग विलुप्त हो चुकी है।”

रेबिक, जो अपने करीबी दोस्तों में निमो (Nemo) के नाम से जाने जाते हैं, अपने सभी शानदार गिटार प्रदर्शंन के दौरान दर्शकों को अपने दिल के करीब “फालुन गोंग” से रु-ब-रु अवश्य कराते हैं। वे इस मौके का उपयोग इसलिए करते हैं क्योंकि बहुत कम लोगों को इसका पता है कि एक ऐसा प्राचीन चीनी आध्यात्मिक आंदोलन—फालुन गोंग का उत्पीड़न,चीनी कम्युनिस्ट शासन द्वारा अभी भी चल रहा है। और वे लोगों को इसके प्रति सजग करना चाहते हैं। 

व्रोकलॉ (Wroclaw), पोलैंड में 2016 अंतर्राष्ट्रीय गिटार मास्टर्स प्रतियोगिता (2016 International Guitar Masters Competition) के फाइनल को देखने के लिए उस दिन वहां इकट्ठे हुए दर्शकों के सामने, रेबिक ने यह समझाने के लिए एक मिनट लिया कि “फालुन गोंग” क्या है।

यह आध्यात्मिक अभ्यास, रोजमर्रा की ज़िन्दगी में सत्य,करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों को अपनाने की सीख देता है, जिसका आजकल चीन में प्रतिबंध है।  जो इसका पालन करता है उसे क्रूरता से पीड़ित किया जा रहा है। उन्होंने एक ऐसी आवाज़ में कहा जिसमें उनका दर्द साफ़ नज़र आया। यह अभ्यास पारंपरिक, प्राचीन चीनी संस्कृति का पालन करता है, वह जो कम्युनिस्ट शासन ने अपने दशकों के शासनकाल के दौरान हिंसक तरीके से ख़त्म करने में जो हो सका वो किया है।

“यह वास्तव में मेरे दिल को पीड़ित करता है, यह जानकर कि मेरे जैसे लोगों को [चीन में] ध्यान का अभ्यास करने की बुनियादी स्वतंत्रता नहीं है,” वे दुःख व्यक्त करते हुए कहते हैं। “यह अविश्वसनीय लगता है, लेकिन यह वास्तव में हो रहा है।”

राहत के रूप में संगीत

1980 के दशक में युद्ध-ग्रस्त युगोस्लाविया में रेबिक बड़े हुए, जो आज नोवी सेड (Novi Sad), सर्बिया शहर कहलाता है । मामूली-सी आमदनी वाले परिवार में बढ़ते हुए, संगीत ही उनके लिए सुकून का एक ज़रिया था।

याद करते हुए वे कहते हैं, “मेरी माँ मुझे बताती थीं कि मैं हमेशा उन्हें मेरे लिए संगीत बजाने को कहता था।” “मैं बस नृत्य करता था … तब जब मैं चल भी नहीं पाता था।”

12 साल की उम्र में, संयोग से अपने परिवार की अलमारी के पीछे एक पुराने, टूटे गिटार के मिलने पर, उनके जीवन ने एक गति तय कर ली जो उनके लिए आजीवन का जुनून बन गया।

“मैंने बस तार छेड़ना शुरू कर दिया,” वे याद करते हुए कहते हैं। “मैंने सारा दिन गिटार बजाया। किसी ने मुझे ऐसा करने को नहीं कहा था। मैं बस ऐसा करना चाहता था।”

अपने कॉलेज के वर्षों में भी गिटार बजाते रहने की बात याद करते हुए वे कहते हैं, “मैं कानून का अध्ययन कर रहा था। मुझे यह पसंद नहीं आया। मैं अपनी पढ़ाई से ज्यादा गिटार बजाता था,”—कुछ ऐसा जो उनके माता-पिता से ज्यादा अनुमोदन नहीं प्राप्त कर पाया।

“एक दिन माँ मेरे कमरे में आईं और कहा, ‘तुम्हारा बर्ताव ऐसा है कि लग रहा है, तुम कानून का अध्ययन नहीं, संगीत का अध्ययन कर रहे हो।'”

1999 में रेबिक के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ आया। नोवी सैड के नाटो बम विस्फोटों के बाद उनकी आंखें खुल गयीं, जो शहर भर में रोज़ाना बम हमलों का एक विनाशकारी 4 महीने तक का लंबा अभियान था। “बम विस्फोट के बाद, मुझे एहसास हुआ कि मुझे वास्तव में अपने दिल की सुननी चाहिए। क्योंकि आप नहीं जानते कि जीवन में कब क्या होगा।”

उन्होंने दो साल बाद कंज़र्वेटोरियम वैन एम्स्टर्डम (Conservatorium van Amsterdam) में पेशेवर रूप से गिटार का शिक्षण लेना शुरू किया। 2006 में, उनकी संगीत यात्रा उन्हें बैंगलोर ले गई, जहां उन्होंने कई प्रसिद्ध स्थानीय स्वामियों के मार्गदर्शन में भारतीय कर्नाटिक संगीत की गूढ़ कला का अध्ययन किया।

अपना रास्ता पाना

रेबिक ने इस साल न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल (Carnegie Hall) में विशेष तौर पर एकल कलाकार के रूप में प्रदर्शन दिया। एक स्टूडियो-रिकॉर्ड एल्बम जिसमें मूल ट्रैक शामिल होता है, जो स्वयं द्वारा रचित और बजाए जाते हैं, वे उसपर भी काम कर रहे हैं और जल्द ही सभी प्लेटफार्मों में रिलीज होने के लिए उसे तैयार कर रहे हैं।

संगीत की उनकी यात्रा से सीखने वाली शिक्षा के बारे में पूछे जाने पर, वे साझा करते हैं कि संगीत “एक सार्वभौमिक संदेश है जिसे दुनिया भर के लोगों द्वारा सुना जा सकता है।”

“यह भाषा से बढ़कर है—यह किसी भी प्रकार की सीमा को पार कर जाता है।”

गिटार पर पवित्र भारतीय संगीत बजाने के गुणों के प्रति अपने कौशल को परिष्कृत करने के बाद, कई अन्य लोगों की तरह जो एक बड़े ब्रेक के लिए बेचैन होते हैं, रेबिक जल्द ही न्यूयॉर्क शहर की ओर चल दिए, जहां उन्हें फ्लशिंग(Flushing), क्वींस (Queens) में शिक्षक की नौकरी मिली।

रेबिक का न्यूयॉर्क में ही सर्वप्रथम फालुन गोंग से परिचय हुआ।

संगीत की कक्षा लेने के बाद एक रात जब वे मेट्रो से घर वापस आ रहे थे, उन्होंने एक महिला को खड़ा पाया और अपनी सीट उस महिला को दे दी, इस बात से अनजान कि उनका यह छोटा-सा सद्भावना भरा कार्य अंततः उनके जीवन को कैसे गंभीरता पूर्वक चिह्नित करेगा।

उन्होंने विनम्रतापूर्वक ज़ोर देते हुए उन्हें बैठने को कहा और दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गयी। उन्होंने रेबिक को फालुन गोंग पेश किया और उन्हें ध्यान अभ्यास सिखाने की पेशकश की। बाद में उन्होंने ज़ुआन फालुन को पढ़ा, वह पुस्तक जो फालुन गोंग अभ्यास के सिद्धांतों को समझाती है।

उन्होंने कहा, “पहली बार मेरा ऐसे गहन सिद्धांतों से सामना हुआ जिसे एक बहुत ही सरल तरीके से समझाया गया था, जिस तरह से एक आधुनिक जीवनशैली वाला व्यक्ति इसे समझ सके और उससे संबद्ध हो सके।” उन्होंने कहा, किताब पढ़ने का अनुभव, “काफी गहरा” था।

लेकिन इस अभ्यास को खोजने के कुछ ही समय बाद रेबिक ने उत्पीड़न के बारे में जाना। 1999 की शुरुआत में ही चीन में वर्षों से अत्यधिक लोकप्रिय होने के बाद भी कम्युनिस्ट शासन ने चीन में फालुन गोंग को गैरकानूनी घोषित कर दिया। और यह उन्होंने सिर्फ और सिर्फ इसलिए किया कि यह अभ्यास कम्युनिस्ट पार्टी की तुलना में अधिक लोकप्रिय हो गया था।और यही उनका एकमात्र डर था।

“चीन में अभ्यासियों के लिए यह एक बहुत ही दुखदायी वास्तविकता है,” उन्होंने समझाया। “[आजकल] यदि वे आपको पार्क में अभ्यास करते पकड़ लेते हैं या यदि वे आपको [ज़ुआन फालुन] पुस्तक के साथ पकड़ लेते हैं … यदि वे देखते हैं कि आप अधिक जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं तो वे आपको खोज निकालेंगे और आप सचमुच मारे जा सकते हैं।”

जागरूकता बढ़ाने के लिए संगीत

तब से रेबिक ने अपने इस मक़सद के लिए अपने समय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फालुन दाफा को समर्पित किया है। आप उन्हें शहर के चारों ओर नियमित रूप से छोटी नीली पत्रिकाएँ बांटते, गुज़रते हुए लोगों को इस अभ्यास को समझाते और चीन में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में वार्तालाप करते हुए अक्सर अपनी 8 वर्षीया बेटी के साथ देख सकते हैं जो उनके पीछे-पीछे चलती रहती है।

फालुन गोंग के उत्पीड़न की जागरूकता बढ़ाने के लिए रेबिक की रचनाओं में से कई ऐसी हैं जो उनके मिशन पर आधारित हैं। एक गीत ऐसा है जो विशेष रूप से उनके दिल के बहुत करीब है।

उन्होंने बताया, “एक ‘साहस का दशक’ (‘Decade of Courage’) नामक वृत्तचित्र है जिसे मैंने कई साल पहले देखा था,” उन्होंने याद करते हुए कहा, “सामने [कवर] पर, एक [फालुन गोंग का] बैनर लिए लाल कोट पहने एक महिला की तस्वीर है। वह अपनी ओर आते हुए व्यक्ति को बहुत शांत तरीके से देख रहीं हैं  … एक सादे कपड़े में पुलिसकर्मी। और वह उस समय शायद उन्हें गिरफ्तार करने या उन्हें ले जाने के लिए आ रहा है। “

रेबिक ने कहा, ” जिस महिला ने सदा उत्पीड़न के मुकाबले में अडिग रहने और अपनी मान्यताओं में डटें रहने में प्रसिद्धि हासिल की थी फिर कभी नहीं देखी गयीं।  अब यह तस्वीर उनके जीवन और विरासत की अंतिम याद के रूप में है। उन्हें डर है कि उनपर अत्याचार कर उन्हें मौत के घाट उतारा गया है।”

“तो मैंने अभी उनके बारे में एक गीत लिखना शुरू किया है और इसे नाम दिया है ‘तियानानमेन का गुलाब’ (Rose of Tiananmen) ।”

रेबिक का कहना है कि उनकी आध्यात्मिकता ने ही उन्हें एक गंभीर संगीतकार का रूप दिया है।

“[प्राचीन संगीत] दिव्य के बारे में कहानियों पर आधारित था,” उन्होंने समझाया, “संगीतकार एक विनम्र सेवक है जो एक सकारात्मक तरीके से जीवन जीने में मदद करने के लिए इन कहानियों को लोगों तक लाता है और उन्हें नैतिकता, साहस, दयालुता और करुणा के बारे में कहानियां सुनाता है—अपने बारे में इतना नहीं। “

“यही वह बात है जहां मैंने देखा है कि मैं फालुन गोंग का अभ्यास शुरू करने के बाद कितना बदल गया हूँ … क्योंकि फालुन गोंग आपको दूसरों के बारे में पहले सोचने को सिखाता है—यह आपको अधिक निःस्वार्थ होने की सीख देता है।”

और अपने संगीत के माध्यम से दूसरों के साथ करुणा की कहानियाँ साझा करने में सक्षम होने के कारण, रेबिक अपनेआप में और अधिक विनम्रता महसूस करते हैं।

“यह एक प्रभावशाली बात है … इन सभी कहानियों को संगीत के माध्यम से साझा करना—यह एक शानदार बात है।”

द एपोक टाइम्स की अनुमति के साथ प्रकाशित।

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