सत्य कड़वा होता है, करेले से भी कड़वा, क्योंकि वो इंसान को सीधे उसके अहं पर हमला करता है। आज हम आपके सामने एक ऐसा ही कड़वा सच लेकर हाजिर हैं। देश के कुछ राज्य जिन्हें आम राज्यों की अपेक्षा कम आंका जाता है और उसे “बीमारू” अर्थात अति पिछड़े राज्यों का दर्जा दिया जाता है। ऐसे राज्यों के दर्जे में शामिल है – बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश। लेकिन इन राज्यों की एक सच्चाई और भी है जो इन सबसे परे है।

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दैनिक जागरण की एक खबर के अनुसार, देश की सबसे कठिन माने जाने वाली परीक्षा “यूपीएससी की परीक्षा” में इन्हीं बीमारू राज्यों से सबसे ज्यादा आईएएस निकलते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान तीन ऐसे शीर्ष राज्य हैं जिन्होंने तथाकथित अति आधुनिक और विकसित राज्यों को पीछे छोड़कर यूपीएससी के इतिहास में सबसे ज्यादा आईएएस अधिकारी दिए।

इस वर्ष बिहार के पटना जिले के अतुल प्रकाश ने इस परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा सहरसा के सागर झा को 13वाँ, पटना के अभिलाष अभिनव को 18वाँ और रविकेश त्रिपाठी ने 334वाँ स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा बिहार से और भी कइयों ने इस परीक्षा में बेहतर स्थान प्राप्त किया है। बिहार के अलावा यूपी और राजस्थान ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है।

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कहते हैं कि आईएएस में सफलता प्राप्त करने का कोई फॉर्मूला नहीं है लेकिन आज हम आपके सामने तीन राज्यों के आंकड़े पेश करने जा रहे हैं जिसको जानकर आपको लगेगा कि शायद इन राज्यों के पास इस परीक्षा को भी पार करने का फॉर्मूला है।

दैनिक जागरण की एक खबर के अनुसार, सबसे ज्यादा आईएएस देने वाले राज्यों में यूपी, बिहार और राजस्थान क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर है। जहाँ यूपी ने 731, बिहार ने 462 और राजस्थान ने देश को 336 आईएएस दिए हैं।

इन तीनों राज्यों का संस्कृति और भारतीय इतिहास में इनका योगदान अनमोल रहा है। ऐसा माना जाता है कि उत्तर के इन दोनों राज्यों, बिहार और यूपी के विद्यार्थी पढ़ाई के मामले में बेहद तेज तर्रार माने जाते हैं। हाल ही में नीट (NEET) के रिजल्ट की घोषणा की गई थी जिसमें बिहार की कल्पना कुमारी ने 99.99 फीसदी अंक के साथ ऑल इंडिया 1 रैंक पर अपना कब्जा जमाया।

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यह सत्य है कि हम किसी राज्य के ऊपरी आवरण को देखकर उसके बारे में एक स्थायी दृष्टिकोण बना लेते हैं, लेकिन इससे पहले कि हम और आगे बढ़ें, जरूरत है कि हम उसके बारे में वे सारे तथ्य जाने जिसको इन सबसे संगुप्त रखा गया है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि जातिप्रथा, दहेज प्रथा, राजनीति और धर्मप्रथा यहाँ मौजूद है लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसमें तेजी से सुधार हो रहा है।

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