एक ऐसी उम्र जहां बच्चों को दुनिया के बारे में जानना और गणितय समस्याओं का हल निकालना चाहिए लेकिन उसी उम्र में कुछ ऐसे निराधार बच्चे हैं जो अपना दिन भीख मांगकर गुजारते हैं। हालाँकि “हर हाथ कलम”( Har Haath Kalam) के संस्थापक हर्ष कोठरी इन बच्चों के जीवन को सुधारने और बेहतर भारत बनाने का प्रयास कर रहे हैं। 

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हर्ष कोठरी एक ऐसे परिवार से हैं जो सदा से सामाजिक कार्य को तवज्जो देते हैं। बेटर इंडिया( The Better India) को दिए एक साक्षात्कार में हर्ष ने कहा,” मुझे लोगों से बातचीत करना अच्छा लगता है, मैं हमेशा से ही सामाजिक कार्य करने का इच्छुक रहा हूँ। मेरे माता-पिता भी सामाजिक कार्यो में हमेशा अग्रसर रहते हैं। मेरे पिता ने मेरे स्कूली जीवन और सामान्य जीवन को बहुत प्रभावित किया है। मैं हमेशा सोचता हूं कि मैंं सभी सामाजिक कार्यो का हिस्सा रहूं।”

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गुजरात में जब भूकंप आया था तब हर्ष के पिताजी ने अपनी शक्तिनुसार सब कुछ किया और लोगों की मदद की। हर्ष ने कहा,”मेरे पिताजी भोजन और अन्य राहत सामग्री इकट्ठा करने के लिए लोगों के पास मदद मांगने जाते थे। और यह निश्चित करते थे की सारी चीजें अच्छे से पैक हों और भेजने के लिए तैयार हों। इन उदाहरणों ने मुझ पर बहुत ही गहरा प्रभाव डाला है।

हर्ष कोठरी ने “हर हाथ कलम”( Har Haath Kalam) की स्थापना 2014 में अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ मिलकर की। निराधार बच्चों को शिक्षित करने और उन्हें भीख मांगने से रोकने के लिए इस संस्था की स्थापना की गयी थी।

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उन्होंने कहा, “हमने सोचा बच्चें भीख मांगकर रोज का ₹1000 तक कमा लेते हैं। ऐसे में उन्हें भीख मांगने से दूर रखकर शिक्षित करने के लिए हमें बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।”

“इसलिए हमने भीख मांगने से रोकने के लिए उनसे पूछने की बजाय एक बहुत ही रचनात्मक समाधान निकाला। हमने कभी भी बच्चों को भीख मांगने से नहीं रोका, क्योंकि हमें पता था इसका कोई परिणाम नहीं निकलेगा। हमने उनके साथ काम शुरू करने से पहले लगभग एक महीने तक उनके व्यस्त रहने के पैटर्न का अध्ययन किया। हमने पाया कि हम इन बच्चों के साथ 5 से 7 बजे के बीच काम कर सकते हैं। और फिर हमने इस समय के बीच में बच्चों को विभिन्न खेलों और कला गतविधियों में शामिल करना शुरू कर दिया।”

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उन्होंने आगे कहा,”हमें बच्चों को अपनी ओर प्रभावित करने में थोड़ा वक्त लगा लेकिन हमें सफलता मिली। और अब हालात यह है कि हमें बच्चों को किसी प्रकार का प्रलोभन देने की जरूरत नहीं पड़ती, वे खुद-ब-खुद हमारे पास आते हैं।”

बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए यह संस्था समारोह आयोजित करती है। इस समारोह में शहर प्रशासन के सदस्यों को आमंत्रित किया जाता है। इन लोगों ने प्रत्येक बच्चें का केस शीट तैयार किया है, जहां बच्चों की समस्याओं का वर्णन किया जाता है और इसके बाद परामर्शदाता इन बच्चों के साथ काम करते हैं और फिर उन्हें स्कूल में दाखिला दिया जाता है।

एक छोटे और आसान तरीके से दान देने की बजाय हर्ष और उनकी टीम ने इन बच्चों को एक बेहतर भविष्य दिया हैं।

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