मई 13 को “अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षी दिवस” (International Migratory Bird Day) है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष मई महीने के दूसरे सप्ताहांत को मनाया जाता है। पक्षियों के बिना यह नीला अम्बर बेजान-सा लगता है। प्रवास, किसी भी जाति के लिए, गर्मी और सर्दी के निवास स्थानों के बीच एक बड़े स्तर पर किया गया आवधिक गमन-आगमन है। ये पक्षियों का, अपना जीवन बचाने के लिए, समय के साथ हुआ क्रम-विकास (Evolution) है।

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आज पक्षियों की कई प्रजातियां खतरे में हैं और कई अत्यधिक संकटग्रस्त स्थिति में पहुँच गई हैं। बर्ड लाइफ़ इंटरनेशनल और रेड डाटा बुक की बातों पर यकीन करें तो पक्षियों की कुल किस्मों में से 19% पक्षी प्रजातियां प्रवासी पक्षियों के अन्तर्गत आती हैं, इनमें 11% प्रजातियां वैश्विक स्तर पर खतरे की सूची में या संभावित खतरे में शामिल की गई हैं।

Birds of India - Siberian crane - Leucogeranus leucogeranus
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हालांकि दुनियाभर के तमाम संगठन प्रवासी पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आ रहे हैं लेकिन यह कोशिश काफी नहीं है। आकाश के इन बंजारों को हमें अपने खेत-खलिहानों, चरागाहों व तालाबों में पनाह देने की भी आवश्यकता है।

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जहाँ प्राकृतिक संपदा के खजाने हैं, वहीं ये प्रवासी पक्षी अपना डेरा डालते हैं। ग्रामीण इलाकों की जमीनें, तालाब, चरागाह, खेत-खलिहान यही सब तो आवास होते हैं। हमारे इन प्रवासी पक्षियों के किन्तु बदलते माहौल ने हमारे ग्रामीणों का परिवेश का स्वरूप भी बदल दिया है । हमारे प्रवासी पक्षी इन्ही तालाबों के किनारे चरागाहों, और परती भूमि में सैकड़ों मीलों की यात्रा के बाद उतरते थे । लेकिन अब इन बदले हालातों में ये पक्षी अपना पड़ाव कहाँ डाले? यह बड़ा सवाल बन गया है।

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संसार में पक्षियों की कई प्रजातियां भोजन, प्रजनन, आवास, जलवायु और सुरक्षा के कारण हर साल हजारों मील का रास्ता तय कर संसार के विभिन्न हिस्सों में जाती हैं। यह प्रवास 4-5 महीने का भी हो सकता है। इन प्रवास स्थलों की दूरी 100 मील से लेकर हजारों मील तक हो सकती है। ख़ास बात यह है कि ये पक्षी इतना लम्बा रास्ता तय कर उन्ही स्थानों पर पहुंचते हैं, जहाँ वे पिछले साल गये थे, यह काम पक्षी बिना किसी नक्शे और राडार प्रणाली के करते है।

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आज बदलती जलवायु, बढ़ता प्रदूषण, पर्यावरण असंतुलन ने ऐसी दशा पैदा कर दी है कि मानव की लालची प्रवृत्ति ने इन पक्षियों के आवास नष्ट कर दिए।इनके शिकार व इनकी उड़ान में बाधाएं खड़ी कर दीं।नतीजा यह रहा कि अब जब इनकी प्रजातियां ही खतरे में पड़ीं  तो विश्व स्तर पर इन सुन्दर पक्षियों के संरक्षण के लिए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाने की जरूरी मुहिम प्रारम्भ की गई।

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