विश्व दूरसंचार दिवस (World Telecom Day) प्रत्येक वर्ष मई 17 को मनाया जाता है। आधुनिक युग में फोन, मोबाइल और इंटरनेट लोगों की प्रथम आवश्यकता बन गये हैं। इसके बिना जीवन की कल्पना करना बहुत ही मुश्किल हो चुका है। आज यह इंसान के व्यक्तिगत जीवन से लेकर व्यावसायिक जीवन में पूरी तक प्रवेश कर चुका है।

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पहले जहाँ किसी से संपर्क साधने के लिए लोगों को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं आज मोबाइल और इंटरनेट ने इसे बहुत ही आसान बना दिया है। व्यक्ति कुछ ही सेकेंड में बेहद असानी से दोस्तों, परिवार और सगे संबधियों से संपर्क साध सकता है। यह दूरसंचार की क्रांति है जिसकी बदौलत भारत जैसे कुछ विकासशील देशों की गिनती भी विश्व के कुछ ऐसे देशों में होती है जिनकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से रफ्तार पकड़ रही है।

विश्व दूरसंचार दिवस मनाने की परंपरा मई 17, 1865 में शुरू हुई थी, लेकिन आधुनिक समय में इसकी पुनः एक नए मक़सद से  शुरुआत 1969 में की गई। तभी से पूरे विश्व में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

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वर्तमान समय में दूरसंचार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इंटरनेट है। इसमें कोई शक नहीं है कि जिन लोगों की पहुंच इंटरनेट तक है, उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इंटरनेट ने सब के जीवन को काफ़ी सरल बना दिया है। इसके जरिए असंख्य सूचनाओं को पलक झपकते ही मात्र कुछ चंद सेकेंडों में ही प्राप्त किया जा सकता है। इंटरनेट सिर्फ सूचनाओं के लिहाज से ही नहीं, बल्कि सोशल नेटवर्किग से लेकर स्टॉक एक्सचेंज, बैंकिंग, ई-शॉपिंग आदि के लिए अब अहम बन चुका है।

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आज इंटरनेट के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, अपनी विश्वसनीयता को बरकरार रखना। जिस तरह से इंटरनेट ने हमारे जीवन को सरल बनाने में अहम योगदान दिया है, उसी तरह इसने कई ऐसी समस्याएँ भी उत्पन्न कर दी हैं, जिससे कहीं न कहीं हमारा समाज दूषित हो रहा है। देखें तो आज इंटरनेट पर काम कम और इसका दुरुपयोग ज्यादा हो रहा है। एक बड़ी चुनौती है साइबर अपराध, जिसकी आड़ में लोग अफवाह फैला कर देश में साइबर युद्ध जैसे हालात पैदा करने की कोशिश करते रहते हैं।

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