असम की ढेर सारी संस्कृतियों में से बिहू एक ऐसी परंपरा है जो यहां का गौरव है। असम के सभी लोग बड़े उत्साह से बिहू पर्व को मनाते हैं। असम के हरे–भरे व वर्षा से तृप्त मैदानी भागों में वस्तुतः तीन बिहू मनाए जाते हैं, जो कि तीन ऋतुओं के प्रतीक हैं। इस त्यौहार के मनाने से हमें अपने प्राचीन धर्म की महानता के दर्शन करने की एक नयी दृष्टि मिलती है।

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यह पर्व नृत्य–संगीत के माध्यम से मानव मन, विशेषकर युवा, युवतियों के लिए तो बहुत ही खुशी का पर्व होता है। यह पर्व असम की प्राकृतिक छटा को तो दर्शाता ही है, साथ ही यह भी संदेश देता है कि जीवन एक कला है, जो इस कला को जानकर जीते हैं, खुशियाँ उनके क़दम चूमती है।

असम के हरे–भरे व वर्षा से तृप्त मैदानी भागों में वस्तुतः तीन बिहू मनाए जाते हैं,जो कि तीन ऋतुओं के प्रतीक हैं।

1. प्रथम बिहू

इसे “बोहागबिहू या रंगोलीबिहू” कहते हैं। अप्रैल में चैत्र या बैसाख के संक्रमण काल में मनाया जाता है। यह असम का मुख्य पर्व है। यह बिहू सात दिन तक अलग-अलग रीति-रीवाज के साथ मनाया जाता है। उसी समय धरती पर बारिश की पहली बूंदें पड़ती हैं और पृथ्वी नए रूप से सजती है। जीव-जंतु एवं पक्षी भी नई जिंदगी शुरू करते हैं। नई फसल आने की हर तरह से तैयारी होती है।

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इस बिहू के अवसर पर संक्रांति के दिन से बिहू नाच नाचते हैं। इसमें 20-25 की मंडली होती है जिसमें युवक एवं युवतियां साथ-साथ ढोल, पेपा, गगना, ताल, बांसुरी इत्यादि के साथ अपने पारंपरिक परिधान में एक साथ बिहू करते हैं। इसके साथ-साथ खेती में पहली बार हल भी जोता जाता है।

2. द्वितीय बिहू

इस दिन को “काति या कंगाली बिहू” कहते हैं। यह कार्तिक मास (अक्टूबर) में होता है। इस बिहू को काति इसलिए कहा गया है क्योंकि उस समय फसल हरी-भरी नहीं होती है इसलिए इस बिहू को कंगाली बिहू भी कहा जाता है।

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धान असम की प्रधान फसल है, इसलिए धान लगाने के बाद जब धान की फसल में अन्न लगना शुरू होता है उस समय नए तरह के कीड़े धान की फसल को नष्ट कर देते हैं। इससे बचाने के लिए कार्तिक महीने की संक्रांति के दिन में शुरू होता है काति बिहू।

3. तृतीय बिहू

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इसे “माघबिहू” भी कहते हैं तथा यह मकर संक्रान्ति को मनाया जाता है। इस बिहू का नाम भोगाली इसलिए रखा गया है क्योंकि इस दौरान खान-पान धूमधाम से होता है, क्योंकि तिल, चावल, नारियल, गन्ना इत्यादि फसल उस समय भरपूर होती है और उसी से तरह-तरह की खाद्य सामग्री बनाई जाती हैं।

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