प्रत्येक वर्ष अप्रैल 27 को संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) में “नेशनल टेल अ स्टोरी डे” (National Tell a Story Day) यानी कहानी सुनाने का दिवस मनाया जाता है। इस दिन सभी उम्र के लोगों को हर प्रकार की कहानियों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। चाहे वह किसी पुस्तक से पढ़ी हुई कहानी हो, कल्पना हो, बचपन की स्मृति हो या फिर कोई वास्तविक घटना, इस दिन लोग दोस्तों और परिवार को इकट्ठा करने और उन कहानियों को साझा करते हैं।

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Credit: ipohcentralchristianchurch 

कहानियाँ सुनाना एक प्राचीन प्रथा है जो ज्ञान को एक पीढ़ी से अगले पीढ़ी तक पहुँचाती है। यह एक शानदार तरीका है अपनी पारंपरिक संस्कृति, परंपराओं, इतिहास और लंबे समय से चली आ रही कहानियों को दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का। यह मनोरंजन के साथ-साथ शैक्षणिक भी हो सकती हैं । कुछ बेहतरीन कहानियां वास्तविक जीवन के अनुभवों से भी आती हैं।

बचपन में दादा-दादी की कहानियाँ और किस्से सभी को बहुत पसंद आते हैं। हर कहानी कुछ कहती है। आज हम आपको एक कहानी सुनाते हैं।

एक समय की बात है, एक जंगल में सेब का एक बड़ा पेड़ था। एक बच्चा रोज़ उस पेड़ पर खेलने आता था। वह कभी पेड़ की डाली से लटकता, कभी फल तोड़ता, कभी उछल कूद करता था।वह पेड़ भी उस बच्चे से काफ़ी खुश रहता था।

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एक दिन अचानक बच्चा कहीं चला गया और फिर लौट के वापस नहीं आया। पेड़ ने उसका काफ़ी इंतज़ार किया पर वह नहीं आया। पेड़ बहुत उदास हो गया था।

काफ़ी साल बाद वह बच्चा फिर से पेड़ के पास आया पर वह अब कुछ बड़ा हो गया था। पेड़ उसे देखकर काफ़ी खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा।
पर बच्चा उदास होते हुए बोला कि अब वह बड़ा हो गया है और उसके साथ नहीं खेल सकता। बच्चा बोला कि, “अब मुझे खिलौने से खेलना अच्छा लगता है, पर मेरे पास खिलोने खरीदने के लिए पैसे नहीं है”

पेड़ बोला, “उदास ना हो तुम मेरे फल (सेब) तोड़ लो और उन्हें बेच कर खिलौने खरीद लो। बच्चा खुशी-खुशी फल (सेब) तोड़के ले गया लेकिन वह फिर बहुत दिनों तक वापस नहीं आया और पेड़ फिर बहुत दुखी हुआ।

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अचानक बहुत दिनों बाद बच्चा जो अब जवान हो गया था वापस आया, पेड़ बहुत खुश हुआ और उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा। पर लड़के ने कहा कि, “वह पेड़ के साथ नहीं खेल सकता अब मुझे कुछ पैसे चाहिए क्योंकि मुझे अपने बच्चों के लिए घर बनाना है।”

पेड़ बोला, “मेरी शाखाएँ बहुत मजबूत हैं तुम इन्हें काट कर ले जाओ और अपना घर बना लो। अब लड़के ने खुशी-खुशी सारी शाखाएँ काट डालीं और लेकर चला गया। उस समय पेड़ उसे देखकर बहुत खुश हुआ लेकिन वह फिर कभी वापस नहीं आया और फिर से वह पेड़ अकेला और उदास हो गया।

अंत में वह काफी दिनों बाद थका हुआ वहां आया। तभी पेड़ ने उदास होते हुए बोला कि, “अब मेरे पास ना फल हैं और ना ही लकड़ी, अब तो मैं तुम्हारी मदद भी नहीं कर सकता।”

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बूढ़ा बोला कि, “अब उसे कोई सहायता नहीं चाहिए बस एक जगह चाहिए जहाँ वह बाकी जिंदगी आराम से गुजार सके.” पेड़ ने उसे अपनी जड़ो मे पनाह दी और बूढ़ा वहीं रहने लगा।

इस कहानी से अापने क्या सीखा? कमेंट्स में हमें बताइए!

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