कहते हैं, कुछ नया करने का जज़्बा रखने वाले लोग कभी सेवानिवृत नहीं होते। कहीं न कहीं वे अपनी रुचि अनुसार कार्य ढ़ूंढ़ ही लेते हैं। दक्षिण भारतीय राज्य केरल के पूर्व नेवी अधिकारी “राजगोपालन नायर” ने भी कुछ ऐसा ही किया और नेवी से सेवानिवृत होने के बाद इंजीनियरिंग का एक अनोखा नमूना पेश किया। 

68 वर्षीय नायर ने एक ऐसा बायोगैस प्लांट विकसित किया है जो न सिर्फ भोजन पकाने के लिए गैस उपलब्ध कराएगा बल्कि खेती के लिए खाद भी मुहैया कराएगा। नायर ने यह प्लांट महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित वसई में बनाया है जो कि अपने तरह का भारत का इकलौता बायोगैस प्लांट (Biogas Plant) है। इस प्लांट का इस्तेमाल घरेलू और व्यवसायिक दोनों रूप में किया जा सकता है।

दी बेटर इंडिया ने हिन्दुस्तान टाइम्स का हवाला देते हुए लिखा है, यह बायोगैस प्लांट लगभग दो घण्टे तक भोजन पकाने के लिए गैस और चार किलो तरल खाद उपलब्ध करा सकता है, जिसे लोग चाहें तो खेती में इस्तेमाल कर सकते हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए नायर ने कहा, “भारत में बनाया गया यह अपने तरह का पहला पोर्टेबल बायोगैस प्लांट है।”

नायर ने आगे कहा, “मेरा मकसद घरेलू कामकाज़, मांस, चिकन, सब्जियां और बर्तन आदि धोने के दौरान घरों से निकलने वाले तरल कूड़े को कम करना है। मेरे इस प्लांट से घर में उत्पन्न होने वाले इस तरह के कूड़े का इस्तेमाल गैस और खाद के रुप में किया जा सकता है।”

नायर के इस प्लांट को वर्ष 2008 में अपने मूल शहर थ्रिसुर में पहली बार जांचा और इस साल मई 22 को इसे आईएसओ की तरफ से प्रमाण पत्र मिला। 

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