18 वर्षीय अमर लाल अपने सपनों को कभी पूरा नहीं कर पाते अगर नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी उनकी मदद नहीं करते। पांच साल की उम्र में अमरलाल को कैलाश सत्यार्थी ने “बचपन बचाओ आंदोलन”की मुहिम में बचाया था। जिसके बाद अमर के जीवन में निरंतर सुधार हुआ और आज वह एक काबिल वकील बन चुके हैं। 

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अमर राजस्थान के रहने वाले हैं और बंजारा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनके परिवार में किसी को भी स्कूल जाने का मौका नहीं मिला। क्योंकि वह एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते थे। अमर जब पांच साल के थे तब वह एक टेलीफोन पोल ठीक करने का काम करते थे। इस दौरान “बचपन बचाओ आंदोलन” के लोगों ने बालश्रम के शिकार, अमर लाल को बचाया था। 

अमर वकील बनना चाहते थे और समाज के लिए अपना योगदान देना चाहते थे। वह फिलहाल नोएडा में रहकर अपनी कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। वह अपने घर से शिक्षित होने वाले पहले व्यक्ति हैं। वह बलात्कार पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए अपनी वकालत का उपयोग करना चाहते हैं। 

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हाल ही में अमर की कहानी सोशल मीडिआ पर पोस्ट की गयी जिसके बाद कैलाश सत्यार्थी गर्व से अभिभूत हो गए। उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज मेरा बेटा अमर 17 साल की बलात्कार पीड़िता के लिए कोर्ट रूम में खड़ा है। इस उज्वल युवा वकील के माता-पिता के रूप में यह हमारा सबसे गर्व का क्षण है। जिसे हमने पांच साल की उम्र में बालश्रम से बचाया और उन्होंने हमारे बाल आश्रम में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़े !”

ऐसे ही एक अन्य मामले में “बचपन बचाओ आंदोलन” द्वारा किंसु कुमार को बालश्रम से 2003 में बचाया गया था। जब वह मात्र 8 वर्ष का था  तब उत्तरप्रदेश के मिर्ज़ापुर में कारों को साफ़ करता था। अब किंसु कुमार राजस्थान में बीटेक के छात्र हैं और वह आयएएस बनना चाहते हैं।

2016 के एक सर्वे के अनुसार 38.7 मिलियन लड़के और 8.8 मिलियन लड़कियां बालश्रम का शिकार हैं। वहीं कैलाश सत्यार्थी ने “बचपन बचाओ आंदोलन” के तहत अभी तक 87,000 से अधिक बच्चों को बालश्रम से मुक्त किया है। 

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