भारत में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति से हर कोई वाकिफ है। शहरों से दूर किसी गांव का प्राथमिक विद्यालय शिक्षक की बाट जोहता है, तो कहीं सुदूर क्षेत्र का विद्यालय अपने परिसर की देख-रेख करने वाले किसी कर्मचारी की राह देख रहा होता है। लेकिन इन सब से परे कर्नाटक के एक प्राथमिक विद्यालय की कहानी कुछ अलग ही है। यहां के प्रधानाध्यापक शिक्षण कार्य की जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद विद्यालय परिसर की साफ-सफाई का जिम्मा भी उठाते हैं।

दी बेटर इंडिया के अनुसार, कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले के होंगहल्ली गांव के प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक बी महादेश्वर स्वामी, प्राशासनिक जिम्मेदारियां निभाने के बाद विद्यालय के शौचालयों की साफ-सफाई में लग जाते हैं। इसके अलावा वे अपने पैसों से विद्यालय के पुस्तकालय को भी दुरुस्त कर रहे हैं और साथ ही उन्होंने परिसर में खूबसूरत बाग भी तैयार किया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि कैसे महादेश्वर विद्यालय के शौचालयों की साफ-सफाई करते हैं और साथ ही कक्षा में झाड़ू और परिसर में स्थित बगीचे की भी देखभाल करते हैं। एक ग्रामीण ने टीओआई से कहा कि उन्हें जो चीज़ खास बनाती है वो ये है कि वे चाहते हैं कि हर छात्र स्वच्छ वातावरण में रहे और व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी ध्यान दे। महादेश्वर प्रत्येक छात्र को अन्य गतिविधियों में शामिल कराने की पूरी कोशिश करते हैं। प्रधानाध्यापक के इस परिश्रम को देखते हुए छात्रों के परिजन भी प्रसन्न हैं और अपने बच्चों को नियमित विद्यालय भेजते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए महादेश्वर ने कहा, “मैं यहां आठ वर्षों से भी अधिक समय से कार्यरत हूं। इस कार्यकाल में मुझे व्यक्तिगत स्वच्छता और सामाज सेवा करने का भी मौका मिला। वर्ष 1994 में मुझे सरकारी नौकरी मिली और तब से प्रत्येक विद्यालय में, मैं यह कार्य करता आ रहा हूं। हम जहां रहते हैं उसे साफ करना हमारी जिम्मेदारी है। एक स्वस्थ जीवन के लिए शौचालयों को साफ करना अावश्यक है। इसलिए मैं जहां भी जाता हूं अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने की कोशिश करता हूं।”

महादेश्वर के इस परिश्रम की बदौलत, आज इस विद्यालय में करीब 121 छात्र हैं और वे नियमित विद्यालय आते हैं। 

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