जिन पेड़ों की जड़ें बंजर जमीन में भी अपने लिए पानी की तलाश कर लें, वही लंबे समय तक अपने जीवन का आनंद ले सकती है वर्ना संघर्ष न करने पर वे धीरे-धीरे सूख जाएँग और फिर एक दिन अंत निश्चित है। इंसान का सपना पूरा होना भी कुछ इसी प्रकार का होता है, अगर पूरा हो जाए तो जीवन सफल अन्यथा जीवन नीरस हो जात है। आज हम आपको ऐसी ही एक कहानी बताने जा रहे हैं जो उत्तराखंड के प्रमोद मागर क है जिन्होंने खुद के सपनों तक पहुंचने के लिए रास्ते का निर्माण स्वयं किया।

26 वर्षीय प्रमोद का बचपन से सपना था कि वे उफान मारती नदी में एक नौके पर सवार हो कायाकिंग अर्थात राफ्टिंग करें और एक सफल राफ्टर बनें । अपने सपनों के प्रति उनकी दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे जब महज 10 वर्ष के थे तब इन्होंने कायाकिंग करने के लिए उत्तराखंड के राफ्टिंग कैंप में कायाकिंग करने देने के बदले उनका काम करना शुरू किया। प्रमोद एक बेहतरीन राफ्टर के साथ-साथ बेहतरीन गाइड भी हैं।

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एनटीडी के साथ विशेष इंटरव्यू में जब इनसे पूछा गया कि उस वक्त इनकी उम्र कितनी थी जब इन्होंने इस ओर रूख किया और इसकी कोई खास वजह?

तो उन्होंने कहा, “मेरी उम्र महज 10 से 11 वर्ष के बीच रही होगी और शुरूआत में तो इसे फन के रूप में लिया लेकिन जब मन इसमें पूरी तरह रम गया तो मैंने इसे अपना प्रोफेशन बनाने की सोची।“

प्रमोद के अनुसार, आपको अपने सपनों के पीछे तब तक भागना चाहिए जब तक कि वो आपकी गिरफ्त में न आ जाए।

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प्रमोद से जब हमने पूछा कि उनका प्रोफेशन अन्य प्रोफेशन से किस तरह अलग है तो उनका कहना था कि, “मुझे सुबह के 9 से शाम के 6 तक की नौकरी नहीं करनी होती है। मैं नदियों की लहरों के साथ खेलता हुआ उनको चीरता हुआ आगे बढ़ता हूँ। नित नए लोगों से मिलता हूँ। उनके साथ घूमना होता है, उनको घूमाना होता है। अलग संस्कृति के लोगों से मिलने पर पता चलता है कि जिंदगी कितनी रंगीन है। और सबसे बड़ी बात आपको प्रकृति के बीच रहने का मौका मिलता है। इस नौकरी में आपको खुद की फिटनेस पर भी खास ध्यान देना होता है। मेरा शौक ही मेरा प्रोफेशन है।“

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डर पर जीत:

अगर आप न्यूज पेपर पढ़ते हैं तो आए दिन खबर पढ़ते होंगेथा  कि राफ्टिंग करते समय कुछ लोग डूब गए या पानी का बहाव तेज था तो वे उसमें समा गए। तो स्वाभाविक-सी बात है कि प्रमोद को भी इस उफनती हुई नदी के डर का सामना करना पड़ा होगा । जब हमने उनसे इस बारे में पूछा कि उन्होंने कैसे अपने डर पर काबू पाया तो उनका कहना था कि मेरा घर नदी के पास है। उफनती नदी को पार करना मेरे लिए रोजमर्रा का काम था। क्योंकि हर दिन नदी पार करके ही खाना बनाने के लिए लकड़ी या जलावन लेने जाना पड़ता था। अर्थात जिस दिन नदी पार नहीं कर पाए उस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना:

प्रमोद के अनुसार, हर राफ्टर का सपना होता है कि वह एक अच्छी जगह जाकर राफ्टिंग करे। नए लोगों से मिले और अपने करियर को एक नई उड़ान दे।

जब हमने प्रमोद से उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने के बारे में पूछा तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का मौका कब मिला? तो उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में उन्हें पहली बार आईलैंड में राफ्टिंग करने का मौका मिला। वहाँ हर साल कुछ महीनों के लिए इस क्षेत्र में गाइड की जरूरत पड़ती है। उन्होंने भी इसके लिए आवेदन दिया और उन्हें वहाँ काम करने का मौका मिल गया।

मैं जब भी आईलैंड जाता हूँ, गंगा को याद करता हूँ:

प्रमोद के शब्दों में, अपने घर और अपनी मिट्टी की बात ही जुदा है। आप अपनी मिट्टी में जिस तरह खेल-कूद सकते हैं, दोस्तों के साथ जिंदगी के आनंद ले सकते हैं, वो आनंद जरूरी नहीं कि कहीं और मिले।

हमने जब प्रमोद से पूछा कि गंगा और आईलैंड में राफ्टिंग करते समय उन्हें दोनों के बीच क्या फर्क महसूस होता है? तो उनका कहना था कि आईलैंड में गंगा जितनी बड़ी नदी नहीं है। वहाँ राफ्टिंग के समय हमें ड्राईशूट पहनना पड़ता है जबकि गंगा में एक टी-शर्ट पहनकर भी राफ्टिंग की जा सकती है। पता होता है कि गंगा में किस ओर सर्फिंग अच्छे से की जा सकती है। हालाँकि, “सहज तो दोनों ही जगह महसूस करता हूँ लेकिन गंगा की गोद का आनंद ही कुछ और है।” प्रमोद के अनुसार गंगा की गोद माँ की गोद-सी होती है जिसकी छाँव में आपको सुकून मिलता है।

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राफ्टिंग में करियर:

प्रमोद का कहना है कि इस क्षेत्र में करियर काफी उज्जवल है। आपको अच्छी सैलरी मिलती है। आप नई जगह घूमते हैं। लेकिन सबसे जरूरी है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए अपने आपको विकसित करना होगा। प्रमोद का कहना है कि हमारे देश के युवा भी इस में अपना करियर बना सकते हैं लेकिन विदेशों के मुकाबले हमारे पास संसाधनों की कमी है। विदेशों में जहाँ कार्बन बोट और व्हाइट वॉटर कोर्स आदि की सुविधा दी जाती है जो कि ओलंपिक की ओर रूख करने के लिए जरूरी है, ऐसे संसाधनों की हमारे देश में काफी जरूरत है।

रोमांच ही जिंदगी है:

प्रमोद से जब हमने, अपने अभी तक की यात्रा के सबसे रोमांचक यात्रा के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में 12 लोगों के गाइड की एक पूरी टीम लद्दाख के झांझगर में राफ्टिंग करने पहुंची। उस वक्त वहाँ बाढ़ आई थी जिसके कारण नदी का आकार सामान्य से तीन गुणा बड़ा हो गया था। एक बार जब तीसरे दिन की राफ्टिंग के बाद वे नदी के किनारे ही रूके तो सबने खुद से खाना बनाने की सोची। जब सब खाना बना रहे थे तो पता चला कि पहाड़ के ऊपर वाली चोटी पर बाढ़ आई हुई है, उस समय हमें डर तो लगा लेकिन हमें बहुत-सी चीजें सीखने का मौका भी मिला।

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अकादमी की स्थापना:

प्रमोद का कहना है कि आज के युवा अगर इस क्षेत्र में खुद को आगे ले जाना चाहते हैं तो उन्हें खुद को विकसित करना होगा। आगे बढ़ना होगा। प्रमोद चाहते हैं कि इस क्षेत्र में देश के युवा आगे बढ़ें। वे कहते हैं कि इस क्षेत्र में खुद पूरी तरह सफल होने के बाद वे जरूर कोशिश करेंगे कि एक अकादमी की स्थापना की जाए ताकि उनके अनुभव का इस्तेमाल हो सके और किसी दूसरे “प्रमोद” को इतनी मुश्किलों से न गुजरना पड़े।

प्रमोद का कहना है कि आप किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ें। घर वाले दोस्तों और आपके साथ काम करने वाले लोगों की मदद के बिना आपका सफल हो पाना बेहद मुश्किल है। उन्होंने अपनी कहानी बयाँ करते हुए बताया कि उन्हें भी दोस्तों, घर के लोगों ने इस ओर बढ़ने में काफी मदद की। हालाँकि घर की स्थिति खराब थी फिर भी उन्होंने उन्हें अपने सपने की ओर उड़ान भरने से नहीं रोका। जब भी वे राफ्टिंग पर जाते और किसी प्रकार की कोई सूट या किसी अन्य चीज के न होने पर उनके साथ काम करने वाले दोस्त उनकी सहायता करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जब भी वे गंगा से आईलैंड राफ्टिंग के लिए जाते हैं तो सबसे ज्यादा उन्हें गंगा की गोद और अपने घरवालों की याद आती है।

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प्रमोद के अनुसार अपने सपनों के लिए जूनूनी होना बेहद जरूरी है। 15 साल के अपने इस लंबे सफर के बारे में बताते हुए प्रमोद कहते हैं कि आज भी हर चीज जैसे घर की स्थिति, खुद का स्वास्थ, प्रतियोगिता की तैयारी आदि बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिसको लेकर संतुलित होकर चलना पड़ता है। भलेही आपके पास संसाधनों की कमी हो लेकिन अगर सपनों के प्रति जूनून है तो फिर आप खुद के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेंगे।

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