जरा सोचिए कि अगर रोज सुबह आपकी खिड़की पर आकर पंछी चहचहाकर आपको जगाए या फिर पहाड़ों की ठंडी हवाएँ आपको सुलाने के लिए पंखा झेले तो कैसा रहेगा? या फिर घर से निकलते ही बारहसिंगा या फिर कोई अन्य जीव इठलाते हुए मस्ती में झूमते नजर आए तो आपको कैसा महसूस होगा? जी हाँ, हम समझ सकते हैं कि इससे खूबसूरत सुबह और कोई नहीं हो सकती है। आज हम आपको सैर कराने वाले हैं नैसर्गिक सौंदर्य की भरमार से भरपूर मणिपुर की।

 

Would you chose country life over city life any day? Photo By: Tony Chandam

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अगर आप कम बजट में प्राकृति का भरपूर मजा लेना चाहते हैं तो आपके लिए मणिपुर सबसे बेहतरीन जगह होगी। यहाँ तक पहुँचने के लिए अगर आप चाहें तो हवाईजहाज से भी जा सकते हैं जो कि मणिपुर की राजधानी इंफाल तक जाती है या अगर आप सड़क मार्ग से जाना चाहते हैं तो एनएच 2 और 37 के माध्यम से गुवाहाटी और सिल्चर होते हुए वहाँ पहुंच सकते हैं।

मणिपुर से कुछ 60-70 किलोमीटर दूर एक कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क है जो बारहसिंगो का प्राकृतिक घर है। ये देखने में काफी खूबसूरत होते हैं। सबसे सुंदर इनका कपाल होता है। इन बारहसिंगो को सांगाई कहा जाता है। सबसे खास बात यह है कि ये बारहसिंगे सिर्फ मणिपुर में ही पाए जाते हैं।

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Creait: Imphal

इस पार्क का एक बेहद खूबसूरत हिस्सा है मशहूर लोकटक झील। झील के किनारे सेंद्रा की पहाड़ी पर पर्यटन विभाग ने झोपड़ियाँ बनवाई है। देखा जाता है कि हर साल कुछ विशेष काल में दूर देश के पंछी एक निश्चित अवधि के लिए भारत आते हैं। इस पार्क में भी आपको कुछ एेसा ही देखने को मिल सकता है। मणिपुर की लोक संस्कृति अपने आप में अनूठी है। जिसकी झलक यहाँ के पारंपरिक नृत्य और संगीत में देखने को मिल सकती है। कहा जा सकता है कि मणिपुर न सिर्फ प्राकृतिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी सम्पन्न है।

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Credit: Manipur

मणिपुर का मोइरांग स्थल एक मशहूर ऐतिहासिक स्थल है। कहा जाता है कि इंडियन नेशनल आर्मी के जवानों ने यहाँ सबसे पहले आजादी का झं फहराया था। यहाँ एक संग्रहालय भी है जहाँ जवानों के द्वारा उपयोग किए गए सामान रखे गए हैं।

अगर यहाँ के परिवहन की बात की जाए तो यहाँ पहुंचने के लिए हवाई जहाज के अलावा सड़क मार्ग भी है। मणिपुर तीन राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा है- एनएच 39, एनएच 53 और एनएच 150। इसके अलावा पर्यटक रेल मार्ग से भी यहाँ पहुँचते हैं।

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