जकार्ता में हो रहे एशियन पैरा गेम्स में 27 वर्षीय नारायण ठाकुर ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों के 100 मीटर T35 श्रेणी में स्वर्ण पदक जीता। नारायण की जीत की खुशी पूरा देश मना रहा है, लेकिन नारायण के लिए यह सब इतना आसान नहीं था। इसके लिए उन्हें ज़िंदगी के बहुत से उतार-चढ़ाव से होकर गुजरना पड़ा था।

मूल रूप से बिहार के रहने वाले नारायण, लेफ्ट साइड हेमिपैरेसिस (hemiparesis) से पीड़ित हैं। ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनके शरीर का बायां हिस्सा पैरालाइज हो गया था। खबरों के अनुसार, नारायण के पिता को दिल की बीमारी थी जिस कारण उनके परिवार को दिल्ली में ही बसने की मजबूरी थी।  

परिवार ने सोचा कि राजधानी दिल्ली में उनके जीवन की एक नई शुरुआत होगी, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था—यहां स्थिति और भी बिगड़ गई। कुछ ही सालों बाद नारायण के पिता का निधन ब्रेन ट्यूमर के कारण हो गया।

पिता के निधन के बाद नारायण के परिवार की ज़िंदगी बद से बदतर हो गई। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे दरियागंज के एक अनाथालय में भेजा गया ताकि मैं पढ़ाई कर सकूं और मुझे भोजन मिल सके।” बचपन में उन्हें क्रिकेट का बहुत शौक था, लेकिन अनाथालय में उसे पूरा करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने फिर दूसरे खेलों की ओर अपनी रुचि बढ़ा ली। वर्ष 2001 में अनाथालय से निकलने के बाद वे अपने परिवार के साथ झुग्गी में रहने लगे।

उन्होंने आगे कहा, “एक समय ऐसा भी आया जब हम समयपुर बादली के जिस झुग्गी में रहते थे उसे तोड़ दिया गया। हमें पास के एक क्षेत्र में स्थानांतरित होने के सिवा और कोई चारा नही था। हम आर्थिक समस्याओं से बुरी तरह से जूझ रहे थे। मैं डीटीसी बसों की सफाई करता था और ठेले पर भी काम करता था। लेकिन हर समय खेल को लेकर मेरे भीतर एक जुनून सवार था।”

एक जानकार के रुप में किस्मत ने नारायण का दरवाजा खटखटाया और उन्हें जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में एथलेटिक्स का अभ्यास करने का सुझाव दिया। जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम जाने तक के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे क्योंकि इसके लिए उन्हें तीन बसें बदलनी होती थीं। 

फिर उन्होंने त्यागराज स्टेडियम में प्रशिक्षण लेना शुरु किया। इस दौरान वे जीतोड़ मेहनत करते थे जो अंतरर्राष्ट्रीय खेलों में उनके प्रदर्शन में साफ़ नज़र आया, यहां तक कि जकार्ता एशियन गेम्स के चुनाव में भी दिखा। आज उनके परिश्रम का परिणाम दुनिया देख चुकी है।

उन्होंने खुशी ज़ाहिर करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “जकार्ता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। एशियन पैरा गेम्स के 100 मीटर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाला मैं इकलौता भारतीय हूं।”

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