जापानी सांसदों ने हालिया राष्ट्रीय सम्मेलन में बैठक के दौरान ऑर्गन ट्रांस्प्लांट टूरिज़्म (organ transplant tourism) पर रोक लगाने के लिए एक कानून बनाने पर प्रतिबद्धता व्यक्त की।

जनवरी 23 को, कनाडा के मानवाधिकार वकील डेविड मैटस (David Matas), एशिया-प्रशांत के पूर्व कैनेडियन सचिव, डेविड किल्गौर (David Kilgour), और इज़राइल सोसायटी ऑफ ट्रांस्पलांट (Israel Society of Transplantation) के अध्यक्ष डॉ. जैकब लेवी (Dr. Jacob Lavee) के साथ नेशनल डाइट बिल्डिंग में चिकित्सकीय जन-नरसंहार (medical genocide) के संबंध में एक पैनल आयोजित किया गया था।

 

Credit: EpocTimes

मेटास (Matas) और किलगौर (Kilgour) ने चीन में दशकों से हो रहे बलपूर्वक मानव अंगों की तस्करी की घटनाओं की जांच की, अंतश्चेतना  कैदियों के अंगों को निकालने और फिर लाभ के लिए अंगों को प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए बेचने की चीन की राज्य-स्वीकृत प्रणाली का खुलासा किया। उनके शोध इशारा करते हैं कि ज्यादातर कैदी, जो इस प्रक्रिया में मारे गए, वे एक आध्यात्मकि ध्यान अभ्यास, फालुन दाफा के अभ्यासी थे, जो कि 1999 से चीनी शासन द्वारा बल पूर्वक दबाया जा रहा है।

डेविड मेटास, मई 11, 2011 को सैन डिगो यूनिवर्सिटी (San Diego University) के जॉन बी.क्रोक इंस्टिट्यूट फॉर पीस एण्ड जस्टिस(Joan B. Kroc Institute for Peace and Justice) में बोलते हुए।
अंग प्रत्यारोपण की अति आवश्यकता की वजह से सर्जरी के लिए अनेक मरीज चीन आने  लगे और उनकी संख्या तेज़ी से चीन में दिन प्रति दिन बढ़ती गई।  उनका कहना है कि यहां वे एक सप्ताह या एक महीने के भीतर अनुकूल अंगों को प्राप्त करने में सक्षम हैं—अंग दान के आधार पर उनके अपने देश में प्रतिक्षा अवधि से बहुत कम।

मेटास और किलगौर ने पाया कि अंजाने में मेडिकल टूरिज़्म ने चीन के अंग तस्करी के काले कारोबार में अपना योगदान दिया, जहां मांग के आधार पर राज्य में मौत की वजह से त्वरित ट्रांस्प्लांट का निर्धारण होता है।

दोनों जिन्होंने सामुहिक रुप से चीन में होने वाले बलपूर्वक अंगों की तस्करी पर कई अध्ययन किये, उन्होंने अनुमान लगाया कि वर्ष 2000 के बाद से चीन में प्रत्यारोपण प्रत्येक वर्ष दस हज़ार तक पहुंच गया होगा । उनकी रिपोर्ट अनुसार, इन अंगो के स्रोत अधिकांशतः नज़रबंद किए गए फालुन गोंग के अभ्यासी ही हैं।

पैनल के सदस्यों ने जापानी सांसदों से मेडिकल टूरिज्म के खतरों के बारे में बात की और स्वैछिक अंग दान के प्रति जागरुकता फैलाने में कार्यरत हैं—सांस्कृतिक रिति-रिवाज़ के कारण होने वाली मौत जो कि ऐतिहासिक रुप से जापान तक ही सीमित थी (और उस मामले के लिए चीन में भी)।

 

जनवरी 23, 2018 को नेशनल डाइट मेंबर(National Diet Members) पर बात करते हुए पैनलिस्ट(panelist)। पैनल ने चीन में हो रहे जबरन अंग तस्करी पर बात की।
जापान ऑरगन ट्रांस्प्लांट नेटवर्क (Japan Organ Transplant Network) के अनुसार, जून 2017 तक, अंग प्रत्यारोपण के ज़रुरतमंदों की राष्ट्रीय सूची 13,450 तक पहुंच चुकी थी।

जापान में फिलहाल अंगों के बेचने और खरीदने पर रोक लगाने के लिए एक कानून है, लेकिन अभी तक किसी भी नागरिक को अंग प्रत्यारोपण के लिए विदेश जाने से नहीं रोक पाया। अंग व्यापार में अज्ञात स्रोत के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए, ताइवान (Taiwan), नॉर्वे (Norway), चाइल (Chile), और इज़राइल (Israel) में अपने नागरिकों को अंग प्रत्यारोपण के लिए विदेश जाने की क्षमता को सीमित करने के लिए कानून बना है।

इज़राइल में अंगों के किसी भी तरह का मौद्रिक लेन-देन, चाहे वो देश के भीतर हो या बाहर, प्रतिबंधित है, जबकि ताइवान में, अभी भी डॉक्टर मरीज़ों को विदेशी अस्पतालों में भेज सकते हैं, जो कानूनी तरीकों से अंग अभिग्रहण करते हैं। हालांकि, चिकित्सकों को देश से बाहर प्रत्यारोपण करा रहे सभी मरीज़ों की स्थितियों की एक रिपोर्ट देने की आवश्यकता होती है। अस्पताल और चिकित्सक जो रिपोर्ट नहीं देते हैं या पता चलता है कि उन्होंने गलत रिपोर्ट दिया है उन पर जुर्माना और केस दायर किया जा सकता है। अवैध तरीके से अंग प्राप्त करने वाले मरीज़ों को पांच साल से ज्यादा की जेल और मौद्रिक जुर्माना का समना करना पड़ेगा।

साउंड ऑफ होप रेडियो (Sound of Hope Radio) के अनुसार, डॉ. लेवी (Dr. Lavee), इजराइल के प्रत्यारोपण सर्जन ने कहा, चीन का दावा है कि उसने विदेशी मरीज़ों को अपने अस्पतालों में भर्ती करना बंद कर दिया है। सच्चाई ये है कि, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, और एशिया के देश प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए चीन की यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, जापान की तरह इज़राइल में भी अंग दान के खिलाफ सांस्कृतिक प्रतिबंध है, लेकिन हाल के वर्षों में, जन जागरुकता अभियान और जीवित दाता को दिए जाने वाले प्रलोभन की वजह से दान नाटकीय रुप से अत्यधिक बढ़ गया है।

जापानी डाइट प्रतिनिधि सभा के सदस्य, मिनोरु किउची (Minoru Kiuchi) ने कहा, बल पूर्वक की जाने वाली अंग तस्करी, “अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार के लिए एक मुद्दा है कि हर किसी को इस बारे की चिंता होना चाहिए।”

किउची ने आगे कहा, “अच्छे विवेक वाले जापानी लोगों के साथ शुरुआत के लिए, हमें उन लोगों के साथ काम करने की आवश्यकता है जो समान मूल्यों को साझा करते हैं, एक साथ खड़े हों और ऐसा होने से रोकें।”

हिरोशिमा (Hiroshima) की एक प्रतिनिधि, इशिबाशी रिनात्रो (Ishibashi Rintaro) ने कहा, वे अपने गृहनगर के लोगों को इस क्रूरता के बारे में बताएंगी, जबकि, हाउस ऑफ काउंसलर (House of Councilors), अपर चैंबर की सदस्य, हिरोशी यामदा (Hiroshi Yamada) ने कहा, लोग चीन के अपराधों में “सहयोगी” नहीं हो सकते।

दिसंबर 2017 में यामदा (Yamada) ने डाइट बिल्डिंग के अंदर एक सम्मेलन आयोजित करने में मदद की, जहां माट्स और किल्गौर ने सार्वजनिक, मीडिया, चिकित्सा विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपने अध्ययन के निष्कर्षों की व्याख्या की।

जुलाई 2017 में जब एक जापानी अखबार सैंकी शिंबुन (Sankei Shimbun) द्वारा जापानी मेडिकल टूरिस्ट जिन्होंने प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए चीन की यात्रा की थी, के  संबंध में एक रिपोर्ट छापी तब  उसके बाद यह सम्मेलन इस मसले को मीडिया की नज़रों में लेकर आया। एक महीने बाद, अक्टूबर में, जापान के पत्रकारों के एक समूह ने चाइना ऑर्गन ट्रांसप्लांट एसोसिएशन (China Organ Transplant Association) के खिलाफ सतर्कता का गठन किया, जिसका मकसद जापानी ट्रांस्प्लांट टूरिज़्म को रोकना है। जनवरी में पैनल एसोसिएशन का पहला संगठित आयोजन हुआ ।

 

Share

वीडियो

Ad will display in 10 seconds