गुलशन कुमार की कहानी फ़र्श से अर्श तक पहुँचने की कहानी है। उन्होंने भारतीय संगीत उद्योग में ऐसे समय पर कदम रखा जब यह उद्योग धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा था। गुलशन कुमार अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और जज़्बे से संगीत उद्योग को नई ऊँचाइयों पर ले गए थे। वे आम जनता की नब्ज़ को पहचानते थे इसलिए उन्होंने लोगों को वही दिया जो वो चाहते थे। ऐसा करके उन्होंने संगीत उद्योग में नए जीवन और ऊर्जा का संचार किया था। ऑडियो कैसेटों की बिक्री से संगीत क्षेत्र में व्यवसाय की शुरुआत करने वाले गुलशन ने इन्ही कैसेटों को सस्ते दामों पर बनाकर समाज के हर तबके तक पहुँचाया था और हिंदी फिल्म संगीत जगत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया था। 

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Credit: Firkee

आइए आज ऊनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें:

1. गुलशन कुमार का जन्म मई 5, 1956 भारत की राजधानी दिल्ली में एक पंजाबी अरोड़ा परिवार में हुआ था। उनका शुरुआती नाम गुलशन दुआ था।

2. उनके पिता दिल्ली के दरियागंज बाजार में एक फ्रूट जूस विक्रेता थे। यहीं से गुलशन ने व्यवसाय की पेचीदगियों को सीखा था।

3. मात्र 23 साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार के मदद से एक दुकान का अधिग्रहण किया और रिकार्ड्स और सस्ते ऑडियो कैसेट बेचना शुरू कर दिया। संगीत उद्योग में एक बड़ा मुकाम हासिल करने वाले गुलशन की यह एक सामान्य शुरुआत थी।

4. रिकार्ड्स और ऑडियो कैसेट के व्यवसाय से ठीक-ठाक मुनाफा होने लगा तो फिर उन्होंने खुद ही ऑडियो कैसेट बनाना शुरू कर दिया।

5. गुलशन ने अपने ऑडियो कैसेट के व्यवसाय को “सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज़” का नाम दिया जो आगे चलकर एक बड़ा नाम बना। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के पास नोएडा में एक म्यूजिक प्रोडक्शन कंपनी खोल ली। 1970 के दशक में उन्होंने सस्ते दरों पर अच्छी गुणवत्ता वाले संगीत कैसेट बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने इसी संगीत कंपनी के तहत, टी-सीरीज़ संगीत लेबल की स्थापना की। आज, टी-सीरीज देश में संगीत और वीडियोज का सबसे बड़ा उत्पादक है।

6. संगीत के क्षेत्र में पैर पसारने के बाद उन्होंने अपना रुख हिंदी फिल्म उद्योग यानि बॉलीवुड की ओर किया और मुंबई चले गए थे। फिल्म संगीत के साथ-साथ उन्होंने भक्ति संगीत संसार में भी अपनी जोरदार पैठ बना ली और इसका भी मूल मंत्र वही था—सस्ते और गुणवत्ता वाले कैसेट। उन्होंने हिंदू पौराणिक कथाओं से संबंधित फिल्मों और धारावाहिकों का निर्माण भी किया था।

7. फिल्म निर्माण में उन्होंने पहला कदम वर्ष 1989 में “लाल दुपट्टा मलमल का” नामक फिल्म बनाकर किया था। प्रेम प्रसंग पर आधारित इस फिल्म का संगीत बहुत लोकप्रिय हुआ था और फिल्म भी कामयाब हो गई थी। वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म “आशिकी” ने तो सफलता के सारे कीर्तिमान तोड़ दिए थे। इस के साथ गुलशन कुमार ने फिल्म उद्योग में खुद को संगीत के बादशाह के रूप में स्थापित कर लिया था।

8. उन्होंने कई नई प्रतिभाओं को भी अपनी पहचान बनाने का मौका दिया था। फिल्म “सनम बेवफा” ने संघर्षरत गायक सोनू निगम को भी नयी पहचान दी थी। सोनू निगम के अलावा, गुलशन कुमार ने संगीत की दुनिया को कई और प्रतिभावान गायक दिए थे जिनमे कुमार शानू, अनुराधा पौडवाल और वंदना वाजपेयी जैसे गायकों का नाम भी शामिल है।

9. फिल्म उद्योग के सफल व्यवसायियों में से एक, गुलशन कुमार ने अपने धन का एक हिस्सा समाज सेवा के विभिन्न कार्यों के लिए दान करके दूसरे व्यवसायियों और उद्योगपतियों के लिए एक मिसाल कायम की थी। उन्होंने श्री माता वैष्णो देवी में एक भंडारे की स्थापना की जो तीर्थयात्रियों के लिए नि: शुल्क भोजन उपलब्ध कराता है।

10. गुलशन वित्तीय वर्ष 1992-93  में देश के शीर्ष करदाता थे। ऐसा माना जाता है की गुलशन ने मुंबई के अंडरवर्ल्ड के जबरन वसूली की मांग के आगे झुकने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उनकी हत्या कर दी गई थी। गुलशन कुमार की मृत्यु के बाद उनके पुत्र भूषण कुमार ने सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड का पदभार संभाल लिया। उनकी बेटी, तुलसी कुमार, एक जानी-मानी पार्श्व गायिका हैं।

गुलशन कुमार के जीवन पर एक फ़िल्म मुग़ल की भी घोषणा हो चुकी है। इस फ़िल्म में अक्षय कुमार गुलशन के किरदार में होंगे! फ़िल्म का निर्माण गुलशन के बेटे भूषण कुमार कर रहे हैं।

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