मृणालिनी साराभाई का नाम हमेशा ही भारतीय शास्त्रीय संस्कृति के दिग्गजों में लिया जाएगा। उनका पूरा जीवन कला को समर्पित था और उन्होंने अपनी हर साँस कला के नाम की थी। उन्होने दर्पण नृत्य अकादमी की स्थापना की थी जहाँ से लगभग 18000 छात्रों ने भरतनाट्यम और कथकली में तालीम हासिल की है। उन्हें “अम्मा” के तौर पर जाना जाता था। शास्त्रीय नृत्य में उनके योगदान तथा उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें “पद्मभूषण’ से सम्मानित किया था।

Image result for मृणालिनी साराभाई
Credit: News State

आइए आज उनके 100वें जन्मदिन पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें:

1. मृणालिनी साराभाई का जन्‍म मई 11, 1918 को केरल के प्रसिद्व स्वामीनाथन परिवार में हुआ था।

2. उनका विवाह 1942 में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक एवं भौतिक विज्ञानी विक्रम साराभाई के साथ हुआ था।

3. उनकी माँ पूर्व सांसद अम्‍मू स्‍वामीनाथन थी जो दर्पण अकादमी (Darpana Academy of Performing Arts) की संस्‍थापक थीं ।

4. मृणालिनी साराभाई ने 18,000 से भी अधिक छात्रों को भरतनाट्यम और कथकली में प्रशिक्षण दिया था।

5. शास्त्रीय नृत्य की विधाओं भरतनाट्यम और कथकली में महारत रखने वाली मृणालिनी को नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मभूषण और पदमश्री के अलावा अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

6. साराभाई की शिक्षा शांतिनिकेतन में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के निर्देशन में हुई थी। नाटक कला में अमेरिकी कला अकादमी में कुछ समय अध्ययन और अध्यापन करने के बाद साराभाई भारत लौट आईं और भरतनाट्यम का प्रशिक्षण आरंभ कर दिया था।

7. मृणालिनी साराभाई ने भारत लौटकर जानी-मानी नृत्‍यांगना मीनाक्षी सुंदरम पिल्लई से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लिया था और फिर दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य और पौराणिक गुरु थाकाज़ी कुंचू कुरुप से कथकली के शास्त्रीय नृत्य-नाटक में प्रशिक्षण लिया था।

8. विक्रम साराभाई और मृणालिनी साराभाई के दो बच्‍चे हैं। उनके बेटे कार्तिकेय साराभाई सेंटर ऑफ इन्‍वाइरमेंट एजुकेशन (Centre Of Environment Education) के संस्‍थापक हैं और बेटी मल्लिका साराभाई एक प्रमुख नृत्‍यागंना हैं।

Share

वीडियो

Ad will display in 10 seconds