इतिहास पुरुष महाराणा प्रताप का जन्म मई 9, 1540 को उदयपुर, मेवाड़ के कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था। वे सिसौदिया राजवंश में जन्में थे। उनकी मां का नाम जयवंता बाई था जो पाली के सोनगरा अखैराज की पुत्री थीं। महाराणा प्रताप को बचपन में “कीका” के नाम से पुकारा जाता था। महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक गोगुन्दा में हुआ। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थीं। महाराणा प्रताप द्वितीय बुद्धिमत्ता एवं वीरता की मिसाल हैं। महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय और प्रसिद्ध नीलवर्ण अरबी मूल के घोड़े का नाम चेतक था। हल्दी घाटी (1576) के युद्ध में उनके प्रिय घोड़े चेतक ने अहम भूमिका निभाई थी, इसके लिए उसे आज भी याद किया जाता है।

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आज हम आपको इन महान शासक के जन्मदिन पर उनसे जुड़े ऐसे किस्से बताने जा रहें हैं जिनके बारे में आपने शायद ही पहले सुना या पढ़ा होगा:

1. वास्तव में एक आदमी इतना वजन उठा कर हिल भी नहीं सकता लेकिन यह बात सही है कि महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वज़न का था और उनकी छाती का कवच 72 किलो का था। उनका भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था। ये आज भी मेवाड़ राजघराने के संग्राहलय में सुरक्षित हैं।

2. महाराणा प्रताप ने मायरा की गुफा में घास की रोटी खाकर दिन गुजारे थे। इस बात का जिक्र कई किताबों के अलावा राजस्थान की लोक कथाओं में है। यह गुफा आज भी मौजूद है। हल्दी घाटी युद्ध के समय इसी गुफा में प्रताप ने अपने हथियार छुपाए थे। यहां एक मंदिर भी मौजूद है।

3. महाराणा को शिक्षा मां जयवंता बाई ने दी थी। वे उन्हीं की सलाह पर दो तलवारें रखते थे जिससे निहत्थे दुश्मन को भी बराबरी का मौका मिल सके।

4. महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट की खाई पार कराने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ।  एक टांग टूटने के बाद भी वो खाई पार कर गया था।

5. महाराणा प्रताप के घोड़े के सिर पर हाथी का मुखौटा लगाया जाता था, ताकि दूसरी सेना के हाथी घबरा कर भ्रमित हो जाएं।

6. 30 वर्षों तक लगातार प्रयास के बाबजूद अकबर,महाराणा प्रताप को बंदी न बना सका। वह प्रताप की बहादुरी का कायल था। कई लोकगीतों में इस बात का जिक्र है कि महाराणा की मौत की खबर सुनकर अकबर की आँखें भी नम हो गई थीं ।

7. हल्दीघाटी का युद्ध इतना भयंकर था कि युद्ध के 300 वर्षों बाद भी वहां पर तलवारें पायी गयीं । आखिरी बार हल्दीघाटी में तलवारों का जखीरा 1985 में मिला था।

8. महाराणा को भारत का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने कभी अकबर के सामने समर्पण नहीं किया। वे  इकलौते ऐसे राजपूत योद्धा थे जो अकबर को चुनौती देने का साहस रखते थे।

9. मेवाड़ राजघराने के वारिस को एकलिंग जी भगवान का दीवान माना जाता है। छत्रपति शिवाजी भी मूल रूप से मेवाड़ से थे। वीर शिवाजी के परदादा उदयपुर महाराणा के छोटे भाई थे।

10. महाराणा प्रताप की मृत्यु जनवरी 29, 1597 हुई थी।

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