कहते हैं एक सच्चा नेता वह होता है, जो कुर्सी पर नहीं आवाम के दिलों पर राज करे और हिन्दुस्तान के दो ऐसे नेता हैं, जिनके लिए यहां की जनता के दिल में अथाह प्रेम और सम्मान भरा है। एक भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह के नाम से जाने जाते हैं, तो दूसरे की पहचान मिसाइल मैन के रुप में हर हिन्दुस्तानी के दिल-ओ-दिमाग़ में है।

अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ये दोनों ही देश-दुनिया में बहुत से लोगों के प्रेरणा स्रोत हैं। प्रतिभा के धनी इन दोनों व्यक्तित्व को देश सदैव याद रखेगा। बात चाहे राजनीतिक सफर की हो या फिर जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की, दोनों की जिंदगी काफी लंबे समय तक एक ही पटरी पर चली।

इन दोनों महान हस्तियों का जीवन कैसे एक-दूसरे से जुड़ा है, चलिए जानते हैं…

बात यदि राजनीति की करें तो, वर्ष 1999 में जब एक बार फिर एनडीए सत्ता में आई, तो उस बार फिर प्रधानमंत्री के रुप में बीजेपी ने वाजपेयी को देश की बागडोर सौंपी। हालांकि, इस बार वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के रुप में अपना कार्यकाल पूरा किया और वे साल 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहें।

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Credit: Abdul kalam Fan club

वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2002 में राष्ट्रपति पद का चुनाव आया, एनडीए ने डॉ. कलाम को अपने उम्मीदवार के रुप में चुना। विपक्ष ने कलाम को सर-आंखों पर बिठाया और उन्हें देश का राष्ट्रपति बनाने में एनडीए का साथ दिया। इस तरह वाजपेयी और कलाम राजनीतिक सफर पर साथ रहे।

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Credit: Abdul Kalam fan club

राजनीति से दूर पोखरण परमाणु टेस्ट में भी दोनों की अहम भूमिका रही है। वर्ष 1998 में हुए न्यूक्लियर टेस्ट के दौरान जहां अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, तो वहीं डॉ. कलाम ने इसमें मुख्य संगठनात्मक, तकनीकी और राजनीतिक भूमिका निभायी।

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Credit: Dr. APJ Abdul Kalam Centre

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