दुती चंद ने 200 मीटर एशियाई खेलों में अपना दूसरा रजत पदक जीतकर इतिहास बनाया। इससे पहले उन्होंने 100 मीटर स्पर्धा में रजत पदक जीता था। लेकिन इस सफलता को पाने के लिए दुती को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा इससे पूरी दुनिया अनजान है।

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अन्य खिलाड़ियों की तरह दुती ने अपना रास्ता तलाशने के लिए कड़ा संघर्ष किया। लेकिन संघर्ष के साथ बहुत मुश्किलें भी इनके रास्ते में आयीं। इनके विरोधियो ने तो दुती को खेल से बाहर करने की योजना भी बना ली थी। लेकिन जाजपुर की इस 22 वर्षीय लड़की ने सारी बाधाओं को पार कर असली महिला शक्ति की मिसाल कायम की।

दुती को इनकी बड़ी बहन सरस्वती ने सब से ज्यादा प्रेरित किया जो खुद एक राष्ट्रीय धावक रह चुकी हैं। अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के दम पर दुती को भुवनेश्वर की राजधानी में आगे प्रशिक्षण के लिए छात्रवृत्ति मिली। जिसके बाद उन्होंने ताइवान के ताइपै में एशियाई जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते। 

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लेकिन दुती के लिए 2014 का साल बहुत बुरा रहा। जब सारी चीजें दुती के पक्ष में लग रही थी और भारत एक और चैंपियन का इंतज़ार कर रहा था। तब अचानक चीजें बदलीं एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दुती को सूचित किये बिना परीक्षणों की एक श्रृंखला आयोजित की। और बाद में उन्हें बताया गया कि उन्हें प्रतिस्पर्धा से प्रतिबंधित कर दिया गया और शिविर छोड़ने के लिए कहा गया। 

इसके बाद निराश होकर दुती घर लौट आयी जहाँ उन्हें टेलीविज़न के माध्यम से पता चला कि लिंग परीक्षण में विफल होने की वजह से उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया है । 19 साल की दुती के शरीर में एंड्रोजन हार्मोंस की मात्रा काफी ज्यादा थी जहाँ इस अवस्था में किसी महिला में सामान्य से अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरोन बनता है।

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2011 के आयएएएफ़ के नियम अनुसार जो कोई भी महिला खिलाड़ी सामान्य से अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करती है जो कि स्वाभाविक रूप से पुरुषों में देखा जाता है। वह महिला खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करने में अपात्र होगी।

इसके बाद दुती के पास बस यही पर्याय बचे थे या तो खेल छोड़कर गुजारा करने के लिए अन्य विकल्प खोजे , एंड्रोजन स्तर कम करने के लिए शल्य चिकित्सा कराये या फिर शासन के खिलाफ लड़े और न्याय प्राप्त करे।

यह वह समय था जब दुती में एक योध्या पैदा हुआ और उन्होंने तीसरे विकल्प के साथ जाकर स्विटज़रलैंड कोर्ट ऑफ़ आब्रिट्रेशन फॉर स्पोर्ट में इस नियम को चुनौती दी। और एक सीधा सवाल पूछा, ” महिला खिलाड़ियों को अपने पात्रता के लिए लिंग परीक्षण क्यों किया जाना चाहिए।”

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इसके बाद खेल पंचाट ने दुती के पक्ष में फैसला देते हुए कहा, ‘जिन की वजह से किसी महिला में सामान्य से अधिक मात्रा में टेस्टोस्टेरोन बनता है। ऐसे में उसे पुरुष करार देना गलत है। जब तक महिला एथलीटों के लिए टेस्टोस्टेरोन की मात्रा तय नहीं होती तब तक किसी महिला पर बंदिश नहीं लगाई जा सकती है।’

इसके बाद ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों और एशियन खेलों द्वारा दुती पर से प्रतिबन्ध हटा दिया गया। बाद में उन्होंने  रिओ ओलिम्पिक में हिस्सा लेने के लिए कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद वे हैदरबाद चली गयीं जहाँ वे पुलेला गोपीचंद अकादमी में पीवी सिंधू के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं।

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अभी हाल ही में हुए 18वें एशियाई खेलों में दुती ने दो रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया साथ ही अपने 2020 की टोक्यो ओलिम्पिक की राह आसान कर ली। और हमें पूरी उम्मीद हैं यह लड़ाकू योध्या वहाँ पर भी अपने देश का नाम जरूर रोशन करेगा ।

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