जब देव मिश्रा बांद्रा के कार्टर रोड पर केलस्थिनिक्स करते हैं तो हर किसी के होश उड़ जाते हैं। क्योंकि देव के दोनों पैर नहीं हैं और यह कमाल वह सिर्फ अपने हाथों की बदौलत करते हैं। 22 वर्षीय देव ने इंडियाज गॉट टैलेंट में अपने पहले ऑडिशन में सबको हैरानी में डाल दिया था। एक साक्षत्कार के दौरान देव मिश्रा ने अपनी कहानी को साझा किया। 

 
 
 
 
 
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देव का जन्म बिहार के बेगूसराय जिले के ढ़क्करी गांव के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ। वह तीन भाई बहनों में सबसे छोटे थे। जब देव  छह महीने के थे तब उनके पिता बीमारी से चल बसे। जिसके बाद परे घर को संभालने की जिम्मेदारी उनकी माँ पर आ गयी। देव की माँ ने मेहनत मजदूरी कर अपने बच्चो को बड़ा किया।  

देव जब पांच वर्ष के हुए तब से ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था।  घर की माली हालत ख़राब होने से देव ज्यादा नहीं पढ़ पाए। और कोई भी काम करने लगे। देव जब 19 साल के थे तो वह 1 जून 2015 को वेल्डिंग के काम हेतु ठेकेदार के साथ हैदराबाद जाने के लिए स्टेशन पर खड़े थे। तब उन्हें यह नहीं पता था कि यह यात्रा उनका जीवन ही बदल देगा। 

जब वह बरौनी स्टेशन पर खड़े रहकर ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे तब अचानक लोगों की भीड़ की वजह से उन्हें पीछे से जोर का धक्का लगा और वह ट्रेन की पटरी के ट्रैक पर गिर पड़े। ट्रेन मात्र उनसे दस कदम की दूरी पर थी। उन्होंने उठने की कोशिश की लेकिन तबतक पूरी ट्रेन उनके पैरों के ऊपर से  गुजर गयी। 

 
 
 
 
 
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उन्होंने देखा उनके शरीर से उनके पैर अलग हो चुके थे। वह पूरी तरह से दर्द से तड़प रहे थे। तब कुछ लोगों ने उठाकर उन्हें एक कोने में रख दिया। वह लोगों को मदद की भीख  मांग रहे थे लेकिन कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। आखिरकार छह घंटे बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनका बहुत ज्यादा खून बह गया था। डॉक्टरों ने कहा कि वह बच नहीं सकते।

लेकिन शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वह बच गए, यह उनका दूसरा जीवन था। एक महीना अस्पताल में इलाज कराने के बाद वह घर लौट आये। और घर पर उनकी माँ ने उनका तीन महीने तक ख्याल रखा। लेकिन घर आने के बाद उनके भाई का उनके प्रति नजरिया बदल गया था।

अपाहिज होने के बाद देव का भाई उनका तिरस्कार करने लग। वह हमेशा देव को कहते थे कि, “तू जियेगा तो मेरी बदौलत और मरेगा तो मेरी बदौलत” देव का भाई उन्हें बेकार समझने लगे जिस बात से देव पूरी तरह टूट गए थे। इसके बाद देव ने जीवन में कुछ करने की ठानी।

 
 
 
 
 
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उन्हें डॉक्टर से पता चला कि जयपुर में कृत्रिम पैर मिलते हैं। जिसके बाद वह जयपुर चले गए। लेकिन उनके मौजूदा अंग बहुत कम थे इस वजह से यह प्रक्रिया संभव नहीं थी। वह निराश हो गए घर जाते समय उन्होंने मुंबई की ट्रेन पकड़ी उन्हें उम्मीद थी मुंबई सपनों का शहर हैं और यहाँ से हर किसी का सपना पूरा होता है। 

वह मुंबई पहुंच गए उनकी कठिन यात्रा कुर्ला स्टेशन से शुरू हुई। वह मुंबई में किसी को भी नहीं जानते थे। कई दिनों तक वह स्टेशन पर भूखे सोये। इस दौरान उन्होंने कई बड़ी हस्तियों के बंगले के बाहर मदद मांगी लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सिर्फ एक बार जैकी श्रॉफ ने उन्हें पांच हजार रुपयों की मदद की।

एक महीना भटकने के बाद उनकी मुलाकात ज्वेलरी डिज़ाइनर फराह खान अली से हुई।जिसके बाद उनकी किस्मत ने करवट बदली।फराह देव उनके लिए वह फरिश्ता बनाकर आयीं जिसने देव को अपने पैरों पर खड़े होने का सपना सच कर दिखाया। फराह ने पांच लाख खर्च कर देव को प्रोस्थेटिक्स प्राप्त करने में मदद की। फराह ने देव से वादा किया कि वह जब तक जिन्दा हैं उनकी मदद करेंगी। 

इसके बाद फराह ने देव को रहने के लिए जगह दिलाई और वह अब तक उनका ख्याल रख रही हैं। देव ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अपने शरीर की फिटनेस पर ध्यान दिया। और अपनी शरीर की ऊपरी ताकत बढ़ाने में लग गए जिसके लिए वह केलस्थिनिक्स का अभ्यास करने लगे। इससे अपने पूरे शरीर का वजन वे अपने हाथों पर ले सकने लगे। 

दस महीने पहले अभ्यास के दौरान नृत्य प्रशिक्षक विशाल पासवान की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने देव को डांस के कुछ स्टेप्स करने को कहा जिसे देव ने बड़ी अच्छी तरह से करके दिखाये। यह उनके नृत्य की शुरुआत थी। विशाल ने उन्हें डांस सिखाया और अपने कौशल से लोगों को प्रेरित करने के लिए कहा। इस दौरान देव ने कई जगहों पर अपनी डांस प्रस्तुति दी जिसके बाद देव ने इंडियाज गॉट टैलेंट में ऑडिशन देने का फैसला किया। जिसमें वह चुन लिए गए। 

साक्षात्कार के दौरान देव अपने दूसरे राउंड की तैयारी कर रहे थे। इसके साथ ही वह अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई भी पूर्ण कर रहे हैं। फिलहाल वह ज्यादा शिक्षित नहीं हैं। और आम लोगों की तरह जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। जिसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वास्तव में वह एक अच्छी-सी नौकरी करना चाहते हैं क्योंकि वह दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहते। 

 
 
 
 
 
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उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए। वह कहते हैं, समस्याओं से दूर मत भागो बल्कि उनसे लड़ो वह अपने-आप भाग जाएगी। 

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