राजधानी के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में तीन दिवसीय ‘‘स्वयं को जानो योगोत्सव’’ का आज शुभारंभ हुआ। इसका आयोजन मुंगेर स्थित विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय और विश्व योग पीठ की ओर से किया गया है। 

दिल्ली में चार साल बाद हो रहे इस योगोत्सव में देश के प्रबुद्ध वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, योग चिकित्सक, योग शोधकर्त्ता, संन्यासी और योगियों के साथ ही समाज के विभिन्न तबकों के लोग हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम के संयोजक स्वामी शिवराजानंद सरस्वती की उपस्थिति में दो घंटे के उद्घाटन सत्र के दौरान न केवल प्रचलित तरीकों से हटकर आसन, प्राणायाम और योग निद्रा का अभ्यास कराया गया, बल्कि इनके वैज्ञानिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया।

स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने कहा कि आज के समय में योग का व्यावसायीकरण कर दिया गया है, जिससे लोग योग विद्या के मूल उद्देश्यों को भूलते जा रहे हैं। आत्म-ज्ञान प्रदान कराने वाली इस महान विद्या को कमर दर्द, वजन घटाने आदि में सीमित कर दिया गया है। वैसे में सत्यानंद योग परंपरा वाला योगोत्सव शुद्ध और लीक से हटकर है।

उन्होंने कहा कि तीन दिनों के योगोत्सव के दौरान योग के अनेक अल्प-चर्चित, किन्तु अति व्यावहारिक पक्षों को जनता के सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि स्वयं को जानो योगोत्सव भारत यात्रा 2018 की शुरूआत बेंगलुरू से हुई थी। इसके बाद मुंबई और भोपाल होते हुए नई दिल्ली में यह चौथा पड़ाव है। बिहार योग विद्यालय की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर सन् 2013 में मुंगेर में आयोजित विश्व योग सम्मेलन के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए भारत यात्रा की शुरूआत की गई हैं।

पंद्रह अप्रैल तक चलने वाले इस योगोत्सव का प्रातःकालीन सत्र 6.30 बजे से 8.30 बजे तक और सायंकालीन सत्र 6.30 बजे से 8.30 बजे तक होगा। दोनों ही सत्रों में योग के परिप्रेक्ष्य में शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक लाभ आदि विषयों पर व्याख्यान होंगे। यह एक गैर व्यावसायिक कार्यक्रम है । उल्लेखनीय है कि इसके पहले सितंबर 2014 में त्यागराज स्टेडियम में स्वयं को जानो योगोत्सव हुआ था।

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