पीएनबी  को करोड़ो का चूना लगाकर चंपत हुए नीरव मोदी के ठिकानों पर एक-एक कर छापेमारी हो रही है। पंजाब नेशनल बैंक को ₹11,400 करोड़ का चूना लगाने वाले नीरव की अबतक ₹5694 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की जा चुकी है और उनके विभिन्न ठिकानों पर अभी भी छापेमारी जारी है। वैसे देखा जाए तो बीते कुछ सालों में देश में कई बैंकिंग घोटाले उजागर हुए हैं। जो निम्न हैं…

Credit: moneycontrol

2011 

साल 2011 में जांच एजेंसी सीबीआई ने खुलासा किया कि, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और आडीबीआई जैसे कुछ बैंकों ने 10,000 के करीब फर्ज खाते बनाएं, और करीब ₹1,500 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई थी।

2014 

साल 2014 में मुंबई पुलिस ने ₹700 करोड़ के फिक्स डिपॉजिट धोखाधड़ी से संबंधित कई सार्वजनिक ईकाइयों के खिलाफ 9 एफआईआर दर्ज की। इसी साल इलेक्ट्रोथर्म इंडिया (Electrotherm India), जिसने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को ₹436 करोड़ का चूना लगाया था। इसके अतिरिक्त, बिपिन वोहरा (Bipin Vohra), कोलकाता के एक उद्योगपति जिनपर फर्जी दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया  (CBI) से ₹14 बिलियन का घोटाला करने का आरोप है।

इसके अलावा, साल 2014 में एक और घोटाला हुआ था, जिसमें ₹8,000 करोड़ का लोन पास करने के लिए घूस लिया गया था, इसमें सिंडिकेट बैंक (Syndicate Bank) के पूर्व चेयरमैन और एमडी एस.के जैन (SK Jain) भी शामिल हैं।

साल 2014 में ही विजय माल्या को भी यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने डिफॉल्टर घोषित किया, जिसके बाद भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल जैसे कुछ अन्य बैंकों ने भी मुकदमा दायर किया।

2015 

साल 2015 में एक अन्य घोटाला सामने आया जिसमें जैन इंफ्राप्रोजेक्ट (Infraprojects) के कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्होंने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को दो बिलियन से भी ज्यादा का चूना लगाया। इसी साल, फोनी हॉन्ग कॉन्ग कॉर्पोरेशन (Hong Kong corporation) को लेकर विभिन्न बैंकों के अधिकारी भी फॉरेन एक्सचेंज (foreign exchange) घोटाला मामले में शामिल थे। ₹60 बिलियन इधर-उधर करने के लिए उन्होंने सिस्टम को धोखा दिया।

2016 

साल 2016 के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में सिंडिकेट बैंक भी शामिल है, जिसमें चार लोगों द्वारा करीब 380 खाते खोले गए थे, जिन्होंने फर्जी चेक, एलाआईसी (LIC) पॉलिसी और एलओयूएस (LoUs) के माध्यम से बैंक को करीब ₹10 बिलियन का चूना लगाया।

2017 

साल 2017, किंगफिशर एयरलाइंस (Kingfisher Airlines) की वजह से माल्या के ऊपर आडीबीआई (IDBI) और अन्य बैंकों का कर्ज बढ़कर ₹6,500 करोड़ हो गया। सीबीआई ने माल्या के खिलाफ चार्जशीट दायर की। लेकिन वह साल 2016 में ही देश से बाहर भाग गये । फिलहाल ब्रिटेन में रह रहे, माल्या के प्रत्यर्पण की मांग देश के वेस्टमिंस्टर कोर्ट (Westminster Court) में की जा रही है।

इसी साल, विन्सम डायमंड (Winsome Diamonds), जिसे भारत का दूसरा सबसे बड़ा कॉर्पोरेट घोटाला माना जाता है, जांच के दायरे में तब आया जब सीबीआई ने इस समूह और इसके अधिनस्थ काम कर रही कंपनियों के खिलाफ सीबीआई ने छः केस दर्ज किए। ऐसा कहा जा सकता है कि यह अंतर साल 2014 में पता चला। साल 2013 के मध्य में समूह कर्ज चुकता करने में विफल रहा, और बैंक द्वारा उसे डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया। कुल बकाया राशि ₹7,000 करोड़ है।

इसी साल मामला सामने आया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, उसमें डेक्कन क्रोनिकल शामिल है, जिसकी वजह से उसे ₹11.61 करोड़ों का नुकसान हुआ, सीबीआई ने पांच पीएसबी (PSBs) के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया और कंपनी के खिलाफ छः चार्जशीट भरी ।

कोलकाता के जाने-माने कारोबारी और श्री गणेश ज्वेलरी हाउस के प्रमोटर, निलेश पारेख को साल 2017 में सीबीआई ने 10 बैंकों को करीब ₹22.23 बिलियन का घाटा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पारेख को पिछले साल मुंबई हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया।

इस मामले में, सीबीआई ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व क्षेत्रिय प्रमुख और सूरत की एक नीजी लोजिस्टिक कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ केस दायर किया, जिन पर ₹ 8.36 बिलियन के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा था।

2018 

नीरव मोदी के अलावा एक अन्य मामला जो इस साल प्रकाश में आया वो आंध्र बैंक के पूर्व प्रबंधक के संबंध में है, जिन्हें ₹ 5 बिलियन के बैंक घोटाले के साथ संबंध में  प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था, जिसमें गुजरात की एक फार्मा कंपनी भी शामिल थी।

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