इसाई धर्म और धार्मिक स्वतंत्रता पर एक तीव्र कार्रवाई के और एक उदाहरण स्वरुप चीनी प्रशासन बाइबिल एवं इसाइयत संबंधी अन्य पुस्तकों के ऑनलाइन विक्रय पर अब प्रतिबंध लगा रहा है।  चीन के सभी ऑनलाइन पुस्तक विक्रेताओं ने अपने वेबसाएट से इसे एवं इसाइयत संबंधी अन्य पुस्तकों को हटा लिया है।

अप्रैल 3 को यहरिपोर्टआई कि चीन स्थित इसाइयों ने यह देखा कि चीन के मेनलैंड में सभी ऑनलाइन पुस्तक विक्रेताओं ने अपने विक्रय सूची से बाइबिल को हटा लिया है। इन वेबसाइटों में चीन में अमेज़न के स्थानीय वेबसाइट के साथ-साथ, चीनी इ-कॉमर्स साइट यथा अलिबाबा ताओबाओ (Alibaba’s Taobao), जेडी.कॉम (JD.com), एवं डैंगडैंग.कॉम (DangDang.com) आदि सम्मिलित हैं।

इन वेबसाइट पर अपने पुस्तकों के बेचनेवाले अनेक विक्रेताओं ने बीबीसी (BBC) को बताया कि मार्च के प्रारंभिक दिनों में चीन के साइबरस्पेस ऐडमिनिस्ट्रेशन (Cyberspace Administration of China) तथा चीनी सरकार के इंटरनेट सेंसरशिप ब्युरो से उन्हें मार्च 30 से पहले अपनी विक्रय सूची से बाइबिल एवं इसाई धर्म संबंधी अन्य पुस्तकों को हटाने के निर्देश प्राप्त हुए थे।

एक ऑनलाइन विक्रेता ने बीबीसी को बताया कि हालाँकि सेंसरशिप के निर्देश विधिक आदेश के रुप में नहीं प्राप्त हुए हैं तथापि इसका उल्लंघन करने का सिर्फ एक ही अर्थ है कि “यदि आप उन निर्देशों, जिनका पालन आपसे वांछनीय है, का पालन नहीं करते हैं तो आपकी दूकान (ऑनलाइन) को शीघ्र ही बंद कर दिया जाएगा”।

ट्विटर के समान चीन के सार्वाधिक मशहूर माइक्रोब्लॉगिंग साइट वेइबो (Weibo) पर “बाइबिल” के वर्ड सर्च को मार्च 31 से रोक दिया गया है और अप्रैल 1 को इसकी संख्या गिरकर शून्य तक पहुँच गई, जिससे यह शंका हो रही है कि वेइबो ने चीनी प्रशासन के आदेश से इस किवर्ड (keyword) को सेंसर किया है।

चीन में, सामन्य दूकानों ने (जो ऑनलाइन नहीं हैं) कभी भी मुद्रित बाइबिल का विक्रय नहीं किया है, क्योंकि चीनी प्रशासन ने बाइबिल के प्रकाशन को कभी भी आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। चीनी इसाइयों को अपनी पवित्र पुस्तक सिर्फ चीन द्वारा अनुमोदित चर्चों, जो संस्थागत रुप से चीनी प्रशासन द्वारा नियंत्रित होती हैं, से ही खरीदनी पड़ती है। यहाँ तक कि उन चर्चों में भी सख्ती से नियंत्रित एवं निरक्षित की जाती हैं, और चीनी प्रशासन के मर्जी के अनुसार समय-समय पर अनुपलब्ध की जा सकती हैं।

यह प्रतिबंध उसी सप्ताह में लगाया गया जिस सप्ताह में चीनी प्रशासन के स्टेट कॉन्सिल (State Council) ने “अपने नागरिकों की धार्मिक मन्यताओं संबंधी स्वंत्रता का सम्मान करने एवं उसकी सुरक्षा करने” के आशय से एक नया श्वेत पत्र निर्गत किया। केवल कुछ ही अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने चीनी प्रशासन के धार्मिक स्वतंत्रता के वादे को गंभीरतापूर्वक लिया है, और यह नया श्वेत पत्र इस अविश्वास को अधिक आधार प्रदान कर रहा है। श्वेत पत्र में यह कहा गया है कि धार्मिक स्वतंत्रता “राष्ट्रीय एवं धार्मिक स्थिति” पर आधारित है और धर्मों को “स्वयं को समाजवादी समाज के अनुसार अनुकूलित कर लेना चाहिए”।

प्रतिबंध उस समय भी लगाया गया था जब कहा गया था कि चीनी प्रशासन एवं वेटिकन राजनैतिक रिश्तों को पुनः प्रारंभ करने वाले समझौते के परिणिति के बहुत अधिक करीब थे। चीनी प्रशासन द्वारा नियंत्रित चीनी कैथोलिक प्रतिनिधियों का एक दल इस समझौते पर विचार-विमर्श करने के लिए मार्च 27 को होलि सी (Holy See) की यात्रा की थी, हालाँकि वेटिकन ने इस यात्रा की पुष्टि करने से इंकार कर दिया है।

चीन द्वारा चीन के मुख्य भूभाग में सभी बिशपों की नियुक्ति स्वयं द्वारा किए जाने के लिए हमेशा दबाव बनाए जाने के कारण वेटिकन और चीन के पिपुल रिपब्लिक के मध्य 1951 से कोई भी राजनैतिक संबंध नहीं है। इस प्रकार की व्यवस्था को खारिज करने वाले अन्य सभी पोप के विपरीत वेटिकन के वर्तमान पोप फ्रांसिस (Pope Francis) चीनी प्रशासन के आगे झुक गए    और यह कहा जाता है कि वे बिंजिंग की शर्तों पर एक समझौते को मानने के लिए तैयार हैं।

फ्रीडम हाउस रिपोर्ट 2017 के अनुसार, “पश्चिमी” मूल्यों के भय एवं धर्म को “चीनी प्रारुप देने” की आवश्यकता के मध्य विवाद के कारण चीनी प्रशासन द्वारा इसाइयों का उत्पीड़न 2014 से नाटकीय रुप से बढ़ गया है।

इपोक टाइम्स ने यह बताया कि हाल के महीनों में चीनी पुलिस ने एक बड़े भूमिगत चर्च को नष्ट करने के लिए विस्फोटक का प्रयोग किया तथा क्रिसमस के अवसर पर इसाइयों की जासूसी करने के लिए राज्य द्वारा अनुमोदित चर्चों में सर्विलांस कैमरा लगवा रही है

The Epoch Times.से अनुमति के साथ प्रकाशित

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