भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने बुधवार को डीप सबमजेन्स रेस्क्यू व्हीकल (Deep Submergence Rescue Vehicles (डीएसआरवी) को सेवा में शामिल कर लिया हैं। मुंबई के डाकयार्ड में हुए समारोह में नौसेना प्रमुख ने कहा कि, “काफी कोशिशों के बाद हम यह प्रणाली हासिल कर पाए हैं। इस प्रणाली के साथ भारतीय नौसेना उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गयी है जिनके पास अभिन्न पनडुब्बी बचाव क्षमता हैं।

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अगस्त 2013 में सिंधुरक्षक सबमरीन पर विस्फोट हो गया था, जिसके बाद पनडुब्बी में आग लग गयी थी। इस आग में तीन अधिकारी समेत 18 लोगों की मृत्यु हो गयी थी। और 3000 टन वजनी पनडुब्बी समुद्र में डूब गयी थी। ऐसी घटना से अधिकारियों को बचाने के लिए डीएसआरवी को नौसेना में शामिल कर लिया गया। 

इसकी खास बात यह है कि यह जरूरत पड़ने पर समुद्र के गहरे पानी में 12 से 18 घंटे रहने में सक्षम है। डीएसआरवी का नौसेना में शामिल होने पर देश के 6 समुद्री तट वाले राज्यों को इसका लाभ होगा। साथ ही परीक्षण के दौरान रेस्क्यू सबमरीन ने सुमद्र के भीतर 666 मीटर गहराई तक सफलतापूर्वक गोता लगाया था जो एक विश्व रिकॉर्ड है। 

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भारतीय नौसेना वर्तमान में सिंधुघोष, शिशुमार, कलावारी क्लासेस जैसी परमाणु ताकत से परिपूर्ण पनडुब्बियों का संचालन करती हैं।डीएसआरवी के जरिये 650 मीटर तक फंसे 14 से 15 नौसैनिकों को दुर्घटनाग्रस्त पनडुब्बी से बाहर निकाला जा सकता है। अक्टूबर महीने में इस सबमरीन ने समुद्र की सतह से 300 फ़ीट नीचे जाकर बचाव अभियान का सफल परीक्षण किया था।  

यह पोत मुंबई में तैनात रहेगा और हादसे के समय इसे वायुसेना की मदद से कुछ ही देर में दुर्घटनास्थल पर पहुंचाया जा सकेगा। यह पोत यूनाइटेड किंगडम(UK) की कंपनी जेम्स फिशर एंड संस प्राइवेट लिमिटेड(James Fisher and Sons) ने तैयार किया है। जल्द ही दूसरा पोत भी भारत आएगा और उसे विशाखापत्तनम में तैनात किया जायेगा। 

 

 

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