दुनिया के सबसे प्राचीन शहर काशी (वाराणसी) को बिजली मिलने के 86 साल बाद, आखिरकार शहर में लटकते तारों से पूरी तरह से छुटकारा मिल गया है।

भारत सरकार के इंटिग्रिटेड पावर डेवलेपमेंट (Integrated Power Development Scheme (IPDS)) के तहत, सरकारी स्वामित्व प्राप्त बिजली कंपनी पावरग्रीड ने सफलता पूर्वक शहर में 16 स्क्वायर कि.मी. भूमिगत बिजली की लाइन को स्थापित कर दिया है जो कि 50,000 उपभोक्ताओं को सेवा देगी।

शहर के जीर्ण रास्ते और भीड़भाड़ वाले बाज़ार का हवाला देते हुए IPDS वाराणसी के प्रबंधक, सुधाकर गुप्ता ने कहा, “वाराणसी में IPDS के क्रियांवित करने के दौरान, हमें एहसास हुआ कि भूमिगत केबल स्थापित करने के लिए यह एक बहुत ही जटिल शहर है।”

यह परियोजना जो कि दिसंबर 2017 में पूर्ण हो गई, इसे पूरा करने में दो सालों का वक्त लगा।

इस परियोजना पर काम करने के दौरान पावर ग्रीड को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्हें सीवर, वाटर सप्लाई और बीएसनल आदि की अव्यवस्थित भूमिगत लाइनों का सामना करना पड़ता था।

कंपनी से कई बार ये लाइनें क्षतिग्रस्त हो जाती थी और उसके बाद संबंधित एजेंसी को क्षतिपूर्ती करनी पड़ती थी। एक अधिकारी का कहना है कि, प्रस्तावित परियोजना रिपोर्ट वास्तविक जरुरतों से बिल्कुल अलग थी।

घटना के कालक्रम ( The Chronology Event )

पूर्व केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जून 2015 में वाराणसी के लिए ₹432 करोड़ की भूमिगत केबल परियोजना की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री नेरेंद्र मोदी ने सितंबर 2015 में वाराणसी में 24×7 बिजली उपलबद्ध कराने के लिए IPDS का शुभारंभ किया। शहर के कबीर नगर और अंसराबाद क्षेत्र में पायलट परियोजना के तहत, यह कार्य दिसंबर 2015 में शुरु हुआ।

 

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