केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिह ने शुक्रवार को राज्य को सलाह देते हुए हुए कहा कि ‘अगर जरूरत पड़े’ तो भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं (मॉब लिंचिंग) के खिलाफ उन्हें ‘सख्त कानून’ बनाना चाहिए।

उन्होंने राज्यों को आश्वस्त किया कि देश में हो रही इस तरह की घटनाओं से लड़ने के लिए सभी तरह की सहायता मुहैया कराई जाएगी। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्होंने लगातार दूसरे दिन इस तरह की घटनाओं की निंदा की और कहा कि इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए।

राजनाथ ने कहा, मैंने इस मुद्दे पर गुरुवार को भी बोला था। मैंने मॉब लिंचिंग की घटना पर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। मैंने यह भी सुनिश्चित किया है कि केंद्र सरकार इस तरह की घटना को रोकने के लिए हर तरह की सहायता मुहैया कराए। मैं राज्य सरकारों को कहना चाहता हूं कि अगर जरूरत पड़े तो इन घटनाओं को रोकने के लिए कड़ा कानून बनाएं।

उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि ‘मॉब लिंचिंग पहले भी हुई है और आजादी के बाद मॉब लिंचिंग की सबसे बड़ी घटना 1984 (सिख विरोधी दंगे) में हुई थी, लेकिन अब ये लोग मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर हमें पाठ पढ़ा रहे हैं।’

उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय ने इस संबंध में राज्य सरकारों को वर्ष 2016 और कुछ दिन पहले ही दो परामर्श जारी किए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कहा।

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