स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी “अनिता बोस फाफ” ने कहा है कि नेताजी के अवशेषों को जापान से भारत लाया जाना चाहिए। जर्मनी में निवास कर रहीं अर्थशास्त्री अनिता ने रविवार को कहा, “मुझे उम्मीद है कि हम इस मुद्दे पर करीब आए हैं और हम उनके अवशेषों को वापस ला पाएंगे।”

उन्होंने कहा मुझे उम्मीद है कि” हम ये सब बिना विवाद उत्पन्न किए ही करेंगे। क्योंकि अगर यह हुआ तो यह सबसे खराब चीज होगी, जो हम नेताजी की यादों के साथ करेंगे।”

अनिता लंदन में प्रसिद्ध भारतीय विदेशी संवाददाता आशीष रे की किताब “लैड टू रेस्ट:द कंट्रोवर्सी ओवर सुभाष चंद्र बोस डेथ” (Land to rest: The Controversy over Subhash Chandra Bose’s Death) के विमोचन के मौके पर बोल रही थीं।

कई लोग इस बात पर विश्वास करने से इंकार करते हैं कि बोस 1945 में ताइपे में एक विमान दुर्घटना में मारे गए थे। राय की किताब इस घटना की जांच के बारे में बताती है, जिसमें 11 अन्य रपटों और कई प्रत्यक्षदर्शियों के निर्णायक सबूत का हवाला दिया गया है, जिससे पता चलता है कि दुर्घटना के बाद बोस की तत्काल मृत्यु हो गई थी। उनके अवशेषों को अब जापान के एक मंदिर में रखा गया है।

अनिता ने कहा कि वे इस बात को समझती हैं कि क्यों रिश्तेदार और उनके प्रशंसक इस घटना को स्वीकार करने से कतराते हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि उस समय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संचार की कठिनाईयों का मतलब था कि कोई भी तत्काल तथ्यों से अवगत नहीं हो सकता था।

उन्होंने कहा, “लोग रहस्यों को पसंद करते हैं और मेरे पिता एक रोमांटिक व ट्रेजिक हीरो थे और इसलिए यह आश्चर्यजनक नहीं है।”

अनिता ने विमान दुर्घटना के बाद उनके बचे रहने की कई परिकल्पनाओं को खारिज कर दिया और 2006 के न्यायमूर्ति मनोज मुखर्जी जांच आयोग द्वारा व्यक्तिगत साक्ष्यों की अनदेखी करने की आलोचना की। रे ने भी अनिता द्वारा बोस के अवशेषों पर समान राय जाहिर की। उन्होंने कहा, यह समय है कि भारत उनके अवशेषों को वापस लाने के लिए कुछ करे।

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