आईएएस अधिकारियों ने मंगलवार को दिल्ली सरकार द्वारा बुलाई गई बैठकों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया और इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नौ दिन के अपने धरने को समाप्त कर दिया और राजनिवास से बाहर निकल आए।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत, समाज कल्याण मंत्री राजिंदर पाल गौतम और खाद्य मंत्री इमरान हुसैन द्वारा बुलाई गई बैठकों में आईएएस अधिकारियों के शामिल होने के बाद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के कार्यालय-सह-आवास से निकलने का निर्णय लिया।

सिसोदिया ने कहा कि अधिकारी अब मंत्रियों के फोन भी उठा रहे हैं। सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने भी कई अधिकारियों से बात की।सिसोदिया ने संवाददाताओं को बताया, मंगलवार को मंत्रियों द्वारा बुलाई गई बैठक में मुख्य सचिव सहित सभी शीर्ष अधिकारी शामिल रहे।

सिसोदिया ने कहा, अपने मंत्रिमंडलीय साथी गोपाल राय के साथ राज निवास से निकलने के बाद केजरीवाल अपने घर गए। बैजल ने केजरीवाल को पत्र लिखकर दिल्ली सचिवालय में अधिकारियों से मुलाकात करने का आग्रह किया और इसके कुछ घंटों बाद ही केजरीवाल ने राज निवास छोड़ने का निर्णय लिया।

गरीबों को घर-घर राशन की आपूर्ति करने की मांग के बारे में पूछने पर सिसोदिया ने कहा कि इसका समाधान बाहर से भी हो सकता है।उन्होंने कहा, उपराज्यपाल ने जब नौ दिनों तक इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो और इंतजार करने का कोई मतलब नहीं। सिसोदिया ने जोर देकर कहा कि दिल्ली सरकार अधिकारियों के खिलाफ नहीं थी।

केजरीवाल ने दिल्ली सरकार में कार्यरत आईएएस अधिकारियों को अघोषित हड़ताल खत्म करने का निर्देश देने की मांग के लिए अपने तीन मंत्रियों के साथ 11 जून से राज निवास में धरने पर थे।

भूख हड़ताल पर बैठे दो मंत्रियों मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन केजरीवाल और उनके मंत्रिमंडलीय साथी गोपाल राय ने अपना धरना जारी रखा था, जिसे देश के कई राजनीतिक दलों का समर्थन मिला था।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds