कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) ने कर्नाटक को जुलाई में तमिलनाडु को लगभग 31 टीएमसी फीट पानी देने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण ने सोमवार को अपनी पहली बैठक की, जबकि इस दौरान यह रपट भी आती रही है कि कर्नाटक इसके गठन के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की योजना बना रहा है।

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और सीडब्ल्यूएमए के चेयरमैन एस.मसूद हुसैन ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, जून माह में सरप्लस को समायोजित करने के बाद प्राधिकरण ने कर्नाटक को पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं।

प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, सामान्य वर्ष के दौरान मासिक जल छोड़ने के आधार पर जुलाई में तमिलनाडु को 34 टीएमसी फीट पानी दिया जाना चाहिए। सीडब्ल्यूसी के अधिकारियों ने सूचित किया कि जून में अच्छे मानसून की वजह से तमिलनाडु ने 3 टीएमसी फीट से ज्यादा पानी प्राप्त किया।

हुसैन ने कहा कि प्राधिकरण की पहली बैठक एक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद यह ऐतिहासिक क्षण था। बैठक में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुड्डचेरी चारों संबंधित पक्ष उपस्थित थे।

नौ सदस्यीय सीडब्ल्यूएमए की अध्यक्षता सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन ने की। कर्नाटक की तरफ से इसके जल संसाधन के मुख्य सचिव राकेश सिंह राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। तमिलनाडु की तरफ से लोक कार्य विभाग के मुख्य सचिव एस.के. प्रभाकर, केरल की तरफ से जल संसाधन सचिव टिंकू बिस्वाल और पुड्डुचेरी की तरफ से पुड्डचेरी विकास आयुक्त सह पीडब्ल्यूडी सचिव ए. अनबारासु मौजूद थे।

चेयरमैन ने कहा, यह प्राधिकरण का निर्णय है और जैसा की मानसून सामान्य है, हम उम्मीद करते हैं कि कर्नाटक के जलाशय में सामान्य जलभराव होगा और कर्नाटक, तमिलनाडु को पानी देने में सक्षम होगा। मैंने किसी भी पक्ष से किसी भी प्रकार के असहयोग को नहीं देखा।

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