भारत का सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट हरियाणा के झज्जर में बनकर तैयार है। और मंगलवार से इसकी सेवाएं शुरू हो गयी हैं। अस्पताल के ओपीडी ब्लॉक का काम पूर्ण हो चुका है। और बुनियादी उपकरण भी लगाए जा चुके हैं। यह भारत की सबसे बड़ी पब्लिक फंड से बनी अस्पताल परियोजना है। इसे 2035 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। 

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एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलरिया को इस अस्पताल का जिम्मा सौंपा गया है। उन्होंने बताया की 710 बिस्तरों वाले इस अस्पताल का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट की अध्यक्षता डॉ. जी.के. रथ करेंगे जो एम्स के रोटरी कैंसर अस्पताल में चीफ ऑफ इंस्टिट्यूट हैं।

इस अस्पताल को तीन चरणों में शुरू किया जायेगा। पहले चरण ने जनवरी से मार्च तक डॉक्टर, नर्स, तकनीकी विशेषज्ञों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी और साथ ही 250 बिस्तर उपलब्ध रहेंगे। और दिसंबर 2019 तक 500 बिस्तरों को बढ़ाया जायेगा। यानी करीब एक साल में यह अस्पताल पूरी तरह से संचालित हो जाएगा।  

अस्पताल के परिचालन के बाद एम्स का बोझ कम हो जायेगा। एम्स रोजाना 1300 मरीजों को देखता है। जिसमें सुविधाओं की कमी के कारण सिर्फ 400 लोगों का ही सही तरीके से इलाज होता है। मौजूदा दौर में कैंसर के मरीज बढ़े हैं और निजी अस्पतालों में इसका इलाज असुरक्षित है। 

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सूत्रों के अनुसार एक्सटर्न रेडिएशन में इस्तेमाल होने वाले दो लीनियर एक्सलरेटर 48 करोड़ की कीमत पर खरीदे जा चुके हैं। साथ ही सीटी स्कैन और एक्स रे मशीन भी खरीदी जा चुकी है। वही इस अस्पताल में एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला का भी निर्माण किया जा चुका है जो रोजाना 60,000 नमूनों को संसाधित कर सकती है।

एक बार पूर्ण तरह से संचालित होने के बाद यह अस्पताल नोडल संस्थान के रूप में कार्य करेगा। और यह देश के सभी केंद्रीय कैंसर केन्द्रों और अन्य संस्थानों के साथ जुड़ा रहेगा। भारत में कैंसर ही दूसरी सबसे बड़ी घातक बीमारी है। एक अध्ययन के अनुसार 1990 में कैंसर मरीजों की संख्या 5.50 लाख थी जो 2016 में बढ़कर 10.60 लाख हो गयी है। 

 

 

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