भारतीय रेलवे ने सारी दुनिया को पछाड़कर एक नया कीर्तिमान बनाया है। भारतीय रेलवे ने पहली बार ख़राब हो रहे डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलकर इतिहास रच दिया है। अब 2700 हार्स पावर की क्षमता वाला डीजल इंजन 5 हजार से 10 हजार हार्स पावर वाले इलेक्ट्रिक इंजन में तब्दील हो सकेगा। 

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मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत स्वदेशी तकनीक अपनाते हुए डीज़ल रेल कारख़ाने ने डब्लूएजीसी 3 श्रेणी के रेल इंजन से शुरुआत की है।जरूरी परीक्षणों के बाद इंजन ने वाराणसी से लुधियाना की अपनी पहली सफल यात्रा 3 दिसम्बर को शुरू की। इसकी अधिकतम गति 75 किमी प्रति घंटा है। 

यह इलेक्ट्रिक रेल इंजन माल गाड़ी में उपयोग किया जायेगा। यह इंजन प्रदूषण मुक्त है और डीज़ल इंजन के मुक़ाबले बेहतर स्पीड और 10 हजार होर्स पावर की क्षमता देने में कारगर है। यह भारतीय रेलवे के मिशन शत प्रतिशत विद्युतीकरण और गैर-कार्बनीकरण के प्रयासों का हिस्सा है।

इस ऐतिहासिक परियोजना पर काम 22 दिसम्बर 2017 को शुरू हुआ और नया लोकोमोटिव 28 फरवरी, 2018 को तैयार हो गया अवधारणा से लेकर डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलने तक का काम महज 69 दिन में पूरा किया गया। इससे लोकोमोटिव की क्षमता 2600 एचपी से बढ़कर 5000 एचपी हो गयी है। 

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बता दें डीजल इंजनों को 18 साल से अधिक समय की अवधि तक चलाने के लिए करीब पांच से छह करोड़ रुपये का खर्च आता है। लेकिन डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक में बदलने में के लिए महज ढाई करोड़ खर्च आया है। जो डीजल इंजनों के खर्च के मुकाबले आधा है। इस डीजल इंजन को वाराणसी के रेल इंजन कारखाने में बनाया गया है। 

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