11 नवंबर 2017

राष्ट्रीय राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सव (डीआईएएफ) का रंगारंग शुभारंभ शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक पुराना किला परिसर में होगा। यह महोत्सव दो सप्ताह तक चलेगा। इसे ‘भारत उत्सव’ के नाम से भी जाना जाता है। उद्घाटन अवसर पर भारत (वंदे मातरम), ताइवान (हू ड्रिंक्स देयर), रूस (बोलशोई : डांस टू फ्लाई, लाफ टू क्राई), अर्जेंटीना (मंद्रागोरा सिरको), यूएसए और ताईवान (तारा कैथरीन पांडेया और बिल्ली चांग) और मिस्र (अल मेन्या) के कलाकार कार्यक्रम पेश करेंगे।

खास बात यह कि इनमें से ज्यादातर कलाकारों की भारत में यह पहली परफॉर्मेस होगी। इतना ही नहीं, पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस फेस्टिवल में देश-विदेश के करीब डेढ़ हजार बेहतरीन कलाकार, संगीतज्ञ और थिएटर के कलाकार लोगों का मनोरंजन करेंगे।

Credit: diaf

दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सव कला-संस्कृति के क्षेत्र में देश का ‘मानक कला उत्सव’ के रूप में स्थापित हो चुका है और इसने विश्व सांस्कृतिक फलक पर भारत को प्रतिष्ठित भी किया है। इसके 11वें संस्करण में भारत अपनी राजधानी में अपने विभिन्न राज्यों के अलावा 26 देशों की मेजबानी करने जा रहा है।

दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सव में एक ही साथ नृत्य, संगीत, थियेटर, पपेट्री, पोएट्री, साहित्य, विजुअल आर्ट्स, फिल्म एवं प्रदशर्नियों से लोगों का साक्षात्कार होता है और इन तमाम विधाओं की समसामयिक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। कई दूतावासों, विदेशी सरकारों, सांस्कृतिक केंद्रों, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रबंधकों, अन्य अंतरराष्ट्रीय उत्सवों एवं कलाकारों की इस कला महोत्सव में हर साल सक्रिय भागीदारी रहती है।

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दो सप्ताह तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव के कार्यक्रम राजधानी के पुराना किला, कुतुबमीनार, सेंट्रल पार्क, सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टिट्यूट, आईजीएनसीए ऑडिटोरियम, कमानी सभागार, इंडिया हैबीटेट सेंटर, बीकानेर हाउस जैसे 25 अलग-अलग इलाकों और स्थान में आयोजित किए जाते हैं, जिससे इसकी भव्यता और विशालता का स्वत: अंदाजा चल जाता है।

दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट्स फेस्टिवल की संस्थापक प्रतिभा प्रहलाद ने कहा कि दिल्ली आर्ट्स फेस्टिवल दुनिया के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय महोत्सवों में से एक है। इस फेस्टिवल में हम कला के पारंपरिक, लोक, शास्त्रीय एवं आधुनिक रूपों को एक ही मंच पर पेश करते हैं। तभी तो दिल्ली कला महोत्सव दुनिया के प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय कला महोत्सवों के समकक्ष है। हमारा मानना है कि सौंदर्यशास्त्र को देशों के द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसलिए हमारा मानना है कि हर किसी को कला गहरे तक छूता है और कला ही हमें अपनी असली पहचान देता है।

उल्लेखनीय है कि इस साल दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव का प्रमुख आकर्षण एएसईएन-इंडिया पार्टनरशिप का कुतुब मीनार पर आयोजित होने वाला सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन होगा, जिसमें वियतनाम के आर्टिस्टिक बॉर्डर गार्डस ग्रुप परफॉर्म करेंगे। इसके साथ ही बांग्लादेश के कलाकार पारंपरिक नृत्य-संगीत के साथ इंडोनेशिया के सुमित्रा डांस ट्रुप एवं फलीपींस के बाहियान ट्रियो के कलाकार भी प्रस्तुति देंगे।

सीमाओं के परे जाकर दुनियाभर से प्रतिभा को आकर्षित करने वाले दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव के अन्य प्रमुख कार्यक्रमों के तहत इंडोनेशिया के कलाकार ‘बालिनेज वायांग’ नामक पपेट डांस पेश करेंगे, जबकि मलेशिया के कलाकार ‘वायांग कुलिट डालांग’ नामक शैडो नाटक की प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा यूके, नॉर्वे, थाईलैंड, पुर्तगाल, फ्रांस, मिस्र, अर्जेंटीना, हंगरी, आयरलैंड जैसे कई अन्य देश भी अलग-अलग सांस्कृतिक विधाओं में परफॉर्मेंस देंगे।

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दरअसल, दिल्ली अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव में हर किसी के मनोरंजन के लिए कुछ-न-कुछ खास जरूर रहता है। यही वजह है कि इस महोत्सव के कलाकार राजधानी के डेढ़ दर्जन स्कूलों का दौरा भी करते हैं और स्कूली बच्चों के बीच सांस्कृतिक ज्ञान और सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इस दौरान स्कूली बच्चों को देश-दुनिया की विरासतों, सांस्कृतिक मूल्यों, परंपाराओं की जानकारी दी जाती है। खास बात यह है कि इस बार महोत्सव में ‘स्वच्छता ही सेवा’ को मूल अवधारणा के तौर पर शामिल किया गया है।

— आईएएनएस

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