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बेंगलुरु में फालुनदाफा अनुयायियों ने चीन में 19 साल से उत्पीड़ित अभ्यासियों को दी श्रद्धांजलि!

बेंगलुरू, भारत, जुलाई 21—जैसे-जैसे उज्ज्वल सूरज धीरे-धीरे क्षितिज में ढलता गया, फालुन दाफा ध्यान करने वालों के एक समूह ने शहर के सबसे व्यस्त मॉल में से एक, द फोरम (The Forum) में, आशा की अपनी-अपनी मोमबत्तियां जलाईं। वे उन निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए थे जिन्होंने 19 साल से चीन में चल रही क्रूरता के कारण अपनी जान गंवा दी थी।

भारत के बंगालुरु में फालुन दाफा अभ्यासी जुलाई 21, 2018 को फोरम मॉल में एक शांतिपूर्ण विरोध में इकट्ठे हुए। (Credit: Veeresh/NTD India)

फालुन दाफा (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) एक प्राचीन ध्यान प्रणाली है जो 1992 में चीन में पेश की गई थी और गहन स्वास्थ्य लाभों के कारण दुनिया भर में इसकी लोकप्रियता में अत्यधिक वृद्धि हुई थी। यह अनुमान लगाया गया है कि 1990 के उत्तरार्ध में 70-100 मिलियन से अधिक लोग अकेले चीन में ही फालुन दाफा के शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली का अभ्यास करने लगे थे।

जुलाई 20, 1999 को, चीनी कम्युनिस्ट शासन के पूर्व नेता जियांग जेमिन ने इस शांतिपूर्ण अभ्यास के खिलाफ उत्पीड़न की अवैध, राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की। अनगिनत, निर्दोष अभ्यासियों को 1999 से चीन में क्रूरता से मारा गया।

फालुन दाफा सूचना केंद्र (Falun Dafa Information Centre) के समूह के प्रेस ऑफिस के अनुसार, हिरासत में होते हुए यातना और दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप अबतक 4,000 से भी अधिक अभ्यासियों की मृत्यु हो गई है, हालांकि वास्तविक संख्या बहुत अधिक है। इसके अलावा, बढ़ते साक्ष्य [1] बड़ी संख्या में फालुन गोंग अभ्यासियों को इंगित करते हैं जिन्हें चीन में जीवित अंग कटाई के अधीन किया गया है।

Credit: Veeresh/NTD India

हालांकि शाम को बारिश की बूंदें ध्यानदाताओं के उज्ज्वल पीले  “सत्य, करुणा, सहनशीलता” वाले टी-शर्ट पर टपकने लगीं, बच्चों और बुजुर्गों सहित मॉल के बाहर इकट्ठा हुए 30 फालुन दाफा अभ्यासियों का समूह 19 साल के उत्पीड़न के विरोध में शांति से बैठा रहा।

व्यस्त खरीदार पृष्ठभूमि में स्क्रीन पर प्रदर्शित जानकारी को पढ़ने और अभ्यास के बारे में और जानने के लिए रुकते और अपनी प्रक्रिया भी व्यक्त करते।

Credit: Veeresh/ NTD India

गुज़रते हुए एक इंजीनियर पेशेवर, विवेक सक्सेना ने कहा, “चीन से हमें जो अधिकतर खबरें मिलती हैं, उन्हें सेंसर किया जाता है, इसलिए हम नहीं जान पाते कि वास्तव में वहां क्या हो रहा है। लेकिन जब हमने इसके (विश्वास के लोगों के उत्पीड़न) बारे में जानाभारत, अमेरिका या कहीं और के एक व्यक्ति के रूप में नहींयह मानव जाति के बारे में है (सहायक)। अंग कटाई न्यायोचित नहीं है।”

एक और दर्शक, पेशे से वकील, ऑलविन सेबेस्टियन (Alwyn Sebastian) ने उल्लेख किया कि उन्होंने पहले एक दोस्त से फालुन दाफा के उत्पीड़न के बारे में सुना था। सेबेस्टियन ने कहा, “जब मुझे पूरी स्थिति के बारे में पता चला, तो मुझे लंबे समय तक बिल्कुल विश्वास ही नहीं हुआ, इसलिए मैंने इसके बारे में खुद से शोध की। मैंने पाया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) को सदा यह भय रहता है जब वे किसी भी समूह को बड़े पैमाने में उभरते देखती  है। उनमें आत्मविश्वास की कमी होने के कारण, जलन की प्रवृत्ति भी  है (जो इसके नियंत्रण के बाहर है), और उन्हें तुरंत लगता है कि उनका शासन खत्म हो जाएगा।”

“इससे मुझे एहसास हुआ कि फालुन गोंग से इतनी अधिक (नैतिक) शक्ति जुड़ी है कि सीसीपी साहित्यिक उन्हें अभ्यास करने के लिए मार देते हैं। यह चौंकाने वाली जानकारी है कि हर साल इतने लोग मर रहे हैं,” सेबेस्टियन ने कहा।

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सेबेस्टियन ने यह भी कहा, “आज मैंने जो मोमबत्ती की रोशनी में प्रदर्शन देखा, वह बहुत शांतिपूर्ण और नीरव था, वहां इतनी भावना थी कि वे पूरी घटना का स्मरण करने की कोशिश कर रहे थे, इतने सारे लोगों की मौत का।”

विनय बी.एल., एक प्रैक्टिसिंग कंपनी सचिव ने लगभग तीन साल पहले फालुन दाफा की अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थी और वे शारीरिक और मानसिक दोनों से बेहद लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा, “मैंने चीन में चल रहे उत्पीड़न के बारे में लोगों को बताने के लिए इस स्मरणोत्सव में भाग लिया है, जो मैं  मानता हूँ कि मानवता के खिलाफ है। मुझे लगता है कि अब इसे रोक देना चाहिए—बिना देर किये ख़त्म कर दिया जाना चाहिए।”

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आध्यात्मिक प्रणाली के अनुयायी भरत वलेचा ने समझाया कि चीन में उत्पीड़न शुरू होने के 19 साल बाद भी, “दुख की बात है कि आज भी भारत जैसे देश में बहुत से लोगों को इसके बारे में पता नहीं है।” वलेचा ने कहा, “अभी भी बहुत से लोग हैं जो अंग प्रत्यारोपण के लिए चीन जाते हैं, वे इस बात से अवगत नहीं हैं कि अंग निकालने के लिए निर्दोष लोगों की मौत हो रही है।”

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“मुझे लगता है कि जब अधिक लोगों को इस उत्पीड़न की सच्चाई के बारे में पता चलेगा, तो कुछ ऐसा भयानकजो मेरे अनुसार हिटलर के समय के दौरान होने वाले नरसंहार से बड़ा हैरोक दिया जा सकता है,” वलेचा ने कहा।