प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को “मन की बात” में गुरु नानक द्वारा सामाजिक भेदभाव मिटाने के लिए शुरू की गई लंगर परंपरा का जिक्र किया, साथ ही कबीर के योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री की बात पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए मध्य प्रदेश के जबलपुर की आशा कार्यकर्ताओं ने मध्याह्न् भोजन और आंगनबाड़ी में सामूहिक भोजन को जातिवाद व सामाजिक भेदभाव मिटाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम करार दिया। मोदी ने रविवार को अपने रेडियो प्रसारण में सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने में संतों के योगदान को याद किया। साथ ही कहा कि गुरु नानक ने सामाजिक भेदभाव से मुक्त रसोई-लंगर की व्यवस्था शुरू की, जहां हर जाति, पंथ, धर्म या संप्रदाय के लोग खाना खा सकते थे।

राज्य के गांव-गांव में प्रधानमंत्री की मन की बात को सुनाने के लिए विभिन्न विभागों ने इंतजाम किए थे। इसी क्रम में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय के फील्ड आउटरीच ब्यूरो (एफओबी) की सहायक निदेशक वर्षा शुक्ला पाठक ने जबलपुर के दियाखेड़ा में मोदी की ‘मन की बात’ सुनाने की व्यवस्था की। गांव की महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोग यहां जमा हुए।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सामाजिक सुधार के लिए संतों के प्रयासों का जिक्र किया गया। इससे महिलाएं काफी खुश थीे। प्रधानमंत्री द्वारा सामाजिक सुधार के लिए गुरुनानक और कबीर के प्रयासों का जिक्र किए जाने पर आशा कार्यकर्ता कीर्ति पटेल अपने को रोक नहीं पाईं। उनका कहना है कि वर्तमान दौर में मध्याह्न् भोजन योजना और आंगनबाड़ी में सामूहिक भोजन भी सामाजिक दूरियां मिटाने में कारगर हो रहा है।

इस मौके पर मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रामकुमारी मरावी, सहायिका सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं उपस्थित थीं। सभी ने कहा कि जातिगत कुरीतियों के बंधन को ढीला करने में मध्याह्न् भोजन योजना व आंगनबाड़ी केंद्र के सामूहिक भोजन सफल हो रहे हैं। इस मौके पर सहायक सूचना अधिकारी संदीप कुमार चौकसे भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यक्रम का संचालन किया।

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