प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को प्रवासी एवं प्रत्यावर्तित जन राहत एवं पुनर्वास योजना के तहत प्रवासियों के राहत और पुनर्वास के लिए गृह मंत्रालय की आठ योजनाओं को 2020 तक आगे बढ़ाने को अपनी मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 2017-18 से 2019-20 तक की अवधि के दौरान इस निर्णय को लागू करने में 3,183 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सालाना आधार पर, वर्ष 2017-18 में 911 करोड़, 2018-19 में 1,372 करोड़ और 2019-20 में 900 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए मंजूर आठ परियोजनाएं पहले से ही संचालित हैं और अनुमोदित मानदंड के अनुसार, प्रत्येक लाभार्थी को इसका फायदा पहुंचाया जाएगा।

बयान के अनुसार, आठ योजनाएं विभिन्न समय पर शुरू हुई थीं, जिनका उद्देश्य विस्थापन का दंश झेल रहे प्रवासियों और प्रत्यावर्तित लोगों को सम्मानजनक जीविका कमाने और मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों में शामिल करना है।

बयान के अनुसार, इस योजना से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और छाम्ब से विस्थापित परिवारों, श्रीलंका के शरणार्थियों, त्रिपुरा में रह रहे ब्रू परिवारों, त्रिपुरा से मिजोरम तक ब्रू या रीयांग परिवारों, 1984 के सिख विरोधी दंगे के पीड़ितों, आतंकवादी घटनाओं, संप्रदायिकता, नक्सली हिंसा, सीमा पार गोलीबारी, भारतीय जमीन पर आईईडी विस्फोट के पीड़ितों, विदेशों से प्रत्यावर्तित भारतीय कैदियों को राहत और पुनर्वास की सहायता दी जाएगी।

केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल सरकार को कूच बिहार जिले में स्थित 51 पूर्व बांग्लादेशी परिक्षेत्रों के आधारभूत विकास के लिए अनुदान भी प्रदान कर रही है। यह सहायता अनुदान बांग्लादेश में भारतीय परिक्षेत्रों में रह रहे 911 लोगों के वापस भारत आने पर उनके पुनर्वास के लिए दी जा रही है।

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