वामपंथ (Left Wing Extremism – LWE) से निपटने के लिए गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) वर्ष 2015 से ही राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना (National Policy and Action Plan) बना रही है। इसमें एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना के साथ सुरक्षा और विकास संबंधित उपाय शामिल हैं।

नई नीति की महत्वपूर्ण विशेषताएं हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता के साथ विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाना है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों के ज़रुरतमंद लोगों को विकास का लाभ मिल सके।

Credit: Facebook | Ministry of Home Affairs, Government of India

गृह मंत्रालय द्वारा 10 राज्यों के 106 जिलों को मार्कस्वाद चरमपंथ से त्रस्त के रुप में चिन्हित किया है। ये जिले गृह मंत्रालय के सुरक्षा संबंधी व्यय योजना (Security Related Expenditure Scheme (SRE)) के अंतर्गत आते हैं, ताकि परिवहन, संचार, वाहन किराए पर लेना, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के लिए वजीफा आदि की भरपाई की राज्य को की जा सके।

106 ज़िलों में से 35 जिले जो देशभर के 80-90 प्रतिशित वामपंथी हिंंसा में सबसे ज्यादा प्रभावित ज़िलों के रुप में चिन्हित किए गए हैं। इस वर्गीकरण ने सुरक्षा और विकास संबंधी दोनों संसाधनों की केंद्रित परिनियोजन के लिए एक आधार प्रदान किया है।

पिछले चार वर्षों में, वामपंथ परिदृश्यों में काफी सुधार हुआ है। 2013 में 34 प्रतिशत की तलुना में वर्ष 2017 में 20 प्रतिशत के साथ हिंसा की घटनाओं में भी कमी दर्ज की गई है। वामपंथ का भौगोलिक फैलाव भी वर्ष 2013 में 76 ज़िलों से घटकर वर्ष 2017 में 58 जिलों तक सीमित हो गया है। इसके अतिरिक्त, इनमें से मात्र 30 जिले देशभर के 90 प्रतिशत वामपंथ हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

हाल ही में गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों के साथ एक व्यापक मंत्रणा की गई, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसाधनों का क्रियान्यवन ज़मीनी स्तर की हकीकतों के साथ मेल खाता है या नहीं। इस प्रकार, 44 ज़िलों को बाहर किया गया है और 8 नए ज़िलों को वामपंथ प्रभावित ज़िलों की सूची में जोड़ा गया है।

केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के त्रिकोणीय केंद्र में वामपंथ के प्रभुत्व की कोशिशों के विरुद्ध, केरल के तीन ज़िलों को वामपंथ ज़िलों में शामिल किया गया है। इस सच्चाई के बजाए कि इन नए ज़िलों में मुश्किल से कोई हिंसा हुई है, यह चाल चलना ज़रूरी था।

इस अभ्यास के परिणामस्वरुप, 11 राज्यों के 90 जिले जो अब इस परियोजना के तहत आ जाएँगे, जो 126 से कम होकर अब 90 तक पहुच हो गया है। अत्यधिक प्रभावित ज़िलों की सूची 36 से कम होकर 30 हो गई है। परिशोधित वर्गीकरण वास्तविक एलडब्ल्यूई परिदृश्य का अधिक यथार्थवादी प्रतिनिधित्व है।

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