बांग्लादेश में इस हफ्ते से शुरू होने जा रहे चुनाव के मद्देनजर म्यांमार से बांग्लादेश आए रोहिंग्याओं के शिविरों पर बांग्लादेश सरकार द्वारा नाकेबंदी का फैसला लिया गया है। कहा जा रहा है कि यह फैसला उनकी सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। इन शिविरों में करीब 10 लाख रोहिंग्या रहते हैं।

 

नवभारत टाइम्स के अनुसार, बांग्लादेश में रविवार को होने जा रहे प्रधानमंत्री चुनाव में पिछले चार बार से बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहीं शेख हसीना इस बार फिर से इस चुनाव में उतरेंगी। रोहिंग्याओं को अपने देश में शरण देने के लिए शेख हसीना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हुई है।

बांग्लादेश के शरणार्थी आयुक्त मोहम्मद अबुल कलाम ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी शर्णार्थी का उत्पीड़न न हो इसलिए चुनाव आयोग ने ये आदेश अपने अधिकारियों को दिया है। यह एक सुरक्षा कदम है जो एनजीओ कार्यकर्ताओं पर भी लागू होता है। वे शिविरों में तभी जा सकते हैं जब आपातकाल की स्थिति हो।

बांग्लादेश चुनाव को देखते हुए चुनाव से कुछ घंटे पहले से ही त्रिपुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट रहेगा। यह कदम बीएसएफ द्वारा उठाया गया है। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को दी। त्रिपुरा से बांग्लादेश की 856 किलोमीटर की लम्बी सीमा लगती है।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds