श्रीलंका में पिछले कुछ दिनों से काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यह उथल-पुथल उस वक्त शुरू हुई जब श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त और पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी सौंप दी।

नवभारत टाइम्स के अनुसार, राष्ट्रपति सिरिसेना द्वारा विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने पर श्रीलंका में काफी राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। यहाँ तक कि संसद में सांसदों के बीच एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की भी हो चुकी है। एक पूर्व वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा कि एक तरफ जहाँ देश आर्थिक अराजकता के कगार पर है वहीं दूसरी तरफ नेता एक-दूसरे से ही उलझे पड़े हैं।

मैत्रिपाल ने न सिर्फ रानिलसिंघे बल्कि उनकी कैबिनेट को भी बर्खास्त कर दिया और सत्ता राजपक्षे के हाथ में थमा दी। लेकिन संसद में इस बात को लेकर खूब हंगामा हुआ और इसके खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव भी पास किया गया।

हालांकि एक विशेषज्ञ का कहना है कि सिरिसेना ने जिस सरकार को नियुक्त किया है उसे वैध नहीं किया जा सकता है। इसका कारण यह है कि विक्रमसिंघे को बर्खास्त करने से पहले उन्होंने सांसदों से मंजूरी नहीं ली थी।

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