पिछले ही महीने बांग्लादेश की सरकार ने यह घोषणा की थी कि म्यांमार से भागकर बांग्लादेश पहुंचे रोहिग्याओं की इस महीने वतन वापसी होगी। लेकिन एक भी रोहिंग्या वतन वापसी को तैयार नहीं है।  कारण है उन्हें आज भी म्यांमार में जान का खतरा महसूस हो रहा है।

 

 
 
 
 
 
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“We’ll never return to #Myanmar without our citizenship & our rights.” Scenes from a demonstration held by #Rohingya #refugees in #Bangladesh against repatriation.

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नवभारत टाइम्स के अनुसार, पिछले वर्ष म्यांमार में सैनिकों द्वारा क्रूरतापूर्ण कार्रवाई के बाद वहाँ से बड़ी संख्यां में रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश पहुंचे। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस क्रूर सैन्य कार्रवाई को नरसंहार कहा था। अक्टूबर में यह तय किया गया था कि बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या अब वतन वापसी कर सकते हैं। इसके मद्देनजर, गुरूवार को करीब 2000 लोगों के वतन वापसी की तैयारी शुरू कर दी गई, लेकिन एक भी शख्स जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। क्योंकि आज भी उन्हें म्यांमार में अपनी जान का खतरा महसूस होता है।

एक अधिकारी ने बताया कि बसें तैयार थीं, राशन भी तैयार था लेकिन एक भी शख्स उसमें सवार नहीं हुआ। एक रोहिंग्या प्रदर्शनकारी ने म्यांमार के खिलाफ अविश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें सुरक्षा और सम्मान चाहिए। उन्हें म्यांमार के किसी भी अधिकारी पर विश्वास नहीं है।

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