लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने वाली भारतीय रेल के लिए एक अच्छी खबर है, फरवरी 22 से इस सार्वजनिक परिवहन को जीई (GE) ट्रांसपोर्टेशन द्वारा नए डीज़ल इंजन मिलेंगे। विकास के बारे में ट्वीट करते हुए, जीई ट्रांस्पोर्टेशन (GE Transportation), एशिया-पेसफिक, के प्रेसिडेंट और सीईओ, नलिन जैन (Nalin Jain) ने कहा कि, भारत में जीई मार्होरा (GE Marhowra) परियोजना के लिए अमेरिका (US) के ईरी (Erie) से अपने रास्ते में 6 उत्पादन इंजनों की सुंदर तस्वीर। यहां पहले से ही 2 इंजन हैं, जो फरवरी 22 को भारत को सौंप दिए जाएंगे। जबकि शुरुआती डीज़ल इंजन अमेरिका में बनाए जाएंगे, अंत में उत्पादन बिहार स्थित जीई के फैक्ट्री में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। 2.5 बिलियन डॉलर की यह परियोजना मोदी सरकार के मेक इन इंडिया के तहत आती है।

 

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जैसा कि नलिन जैन ने वर्णन किया है, दो डीज़न इंजन पहले ही भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। जीई के शीर्ष अधिकारी द्वारा साझा की गई तस्वीर में भारतीय रेलवे के लिए छः नए इंजन दिख रहे हैं, जो आंशिक रुप से बर्फ से ढ़के हुए हैं, लेकिन पीले और लाल टख रंग और सफेद रंग में लिखा गया भारतीय रेलवे स्पष्ट रुप से दिख रहा है। जीई के अनुसार, लाल रंग का अभिप्राय ऊर्जा से है और पीले रंग का ताज़गी से। जीई ने कहा कि, इस रंग पद्दति के लिए करीब 189 लीटर पेंट का इस्तेमाल किया गया–जीई का यह भी दावा है कि खराब मौसम में यह इंजन के बाहरी भाग को सुरक्षा प्रदान करेगा।

जीई परियोजना के साथ शुरुआत करने के लिए अमेरिका से 40 डीज़ल इंजन आयात किए जाएंगे। जो कि दोहरे केबिन 1,676 mm गेज प्रकार के हैं। इस परियोजना के तहत, जीई ट्रांस्पोर्टेशन भारतीय रेलवे के लिए दो प्रकार के डीज़ल इंजनों का निर्माण करेगा—एक 4,500 हॉर्सपावर का और दूसरा 6,000 हॉर्सपावर का होगा और बाद में एकल केबिन वाले इंजनों का निर्माण किया जाएगा। जीई ट्रांस्पोर्टेशन का दावा है कि नए इंजन एयरकंडिशनर और 100 किमी/घंटा की रफ्तार जैसी सुविधाओं से लैस होंगे, जो कि भारतीय रेल की आधारिक संरचना का काफी आधुनिकीकरण करेंगे।

भारत में जीई द्वारा नए डीज़ल इंजनों का निर्माण साल 2018 के तीसरी तीमाही से बिहार के मरहोवरा (Marhowra) स्थित कंपनी के फैक्ट्री में शुरु होगा। कुल एक हज़ार इंजनों में से 700 इंजन 4,500 हॉर्सपावर के होंगे जबकि बाकी के इंजन 6,000 हॉर्सपावर के होंगे। ये सभी 1,000 इंजन भारतीय रेलवे को 10 सालों के अंतराल में सौंप दिए जाएंगे—100 इंजन प्रति वर्ष के हिसाब से इसकी शुरुआत साल 2018 से होगी। गुजरात के गांधीधाम और उत्तर प्रदेश के रोज़ा में जीई मेंटेनेंस शेड का निर्माण भी हो रहा है।

 

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इस बीच एक अन्य विदेशी कंपनी—अल्सटॉम (Alstom)—भी बिहार के माधेपुरा स्थित अपनी फैक्ट्री में भारतीय रेलवे के लिए इलेक्ट्रिक इंजनों का निर्माण कर रही है। भारतीय रेलवे द्वारा 800 इलेक्ट्रिक इंजनों का ऑर्डर दिया गया है। जो कि 120 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ने में सक्षम होंगे। भारतीय रेलवे को अलस्टॉम के इलेक्ट्रिक इंजनों की डिलिवरी जल्द ही शुरू हो जाएगी।

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