जनवरी 2011 के बाद देश में पोलियो का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खतरा अभी टला नहीं है और पंगु बना देने वाली इस बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण पर पूरा ध्यान देना होगा।

खतरा अभी बरकरार है!

मैक्स हॉस्पिटल में शिशु रोग विभाग में सीनियर कन्सल्टेंट डॉ पी एस नारंग ने कहा ‘‘यह सच है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस साल के शुरू में भारत का नाम पोलियो की महामारी वाले देशों की सूची से हटाया था। लेकिन दूसरा सच यह भी है कि जब तक दुनिया में पोलिया का वायरस रहेगा, इस बीमारी का खतरा बना रहेगा। इससे बचाव के लिए टीकाकरण अभियान पर पूरा जोर देना होगा।’’

टीका लगवाना भी है ज़रुरी!

डॉ नारंग ने कहा ‘‘देश में अभी भी बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के साथ साथ दोहरी सुरक्षा की खातिर इसका टीका लगाना भी जरूरी है ताकि बच्चों को पूर्ण सुरक्षा मिल सके। हमें यह भी देखना होगा कि ग्रामीण इलाकों में और शहरी इलाकों के निम्न वर्ग के लोग भी टीकाकरण पर ध्यान दें। यह बहुत जरूरी है।’’

कॉलरा अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ संजीव सूरी ने कहा ‘‘पोलियो का वायरस तीन प्रकार का होता है.. टाइप 1, टाइप 2 और टाइप 3। पोलियो उन्मूलन अभियान के लिए शुरू से ही ओरल पोलियो वैक्सीन दी गई जिसमें जीवित लेकिन निष्क्रिय पोलियो वायरस का उपयोग हुआ। इससे पोलियो का वायरस तो नष्ट होता है लेकिन वैक्सीन एसोसिएटेड पैरालिटिक पोलियो और वैक्सीन डेराइव्ड पोलियो का खतरा होता है जो स्वीकार्य नहीं है।’’

टीके को दी जाती है प्राथमिकता!

इनएक्टीवेटेड पोलियोवायरस वैक्सीन के टीके और इसकी खुराक से दोहरी सुरक्षा मिलती है क्योंकि इसमें जीवित वायरस नहीं होते और इससे वैक्सीन एसोसिएटेड पैरालिटिक पोलियो का खतरा भी नहीं होता। कई देशों ने पोलियो की खुराक के बजाय टीके को प्राथमिकता दी है और इन देशों में पोलियो का वायरस नष्ट करने में सफलता मिली है।’’

2010 के बाद पोलियो के कोई मामले प्रकाश में नहीं  आए!

डॉ नारंग के अनुसार, पोलियो का अंतिम मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में सामने आया था। तब से इस बीमारी के किसी नए मामले की खबर नहीं है। यही वजह है कि भारत को फरवरी में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पोलियोग्रस्त देशों की सूची से हटा दिया था। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि थी। ‘‘लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। हम निश्चिंत नहीं रह सकते। अगर जनवरी 2014 तक इसका कोई नया मामला सामने आता है तो भारत पोलियो मुक्त देश होने का दर्जा खो देगा।’’ देश में पोलियो से प्रभावित दो मुख्य राज्यों उत्तर प्रदेश से अप्रैल 2010 तथा बिहार से सितंबर 2010 के बाद से इस बीमारी के किसी मामले की खबर नहीं है।

डा सूरी ने बताया कि पोलियो ग्रस्त देशों की सूची से भारत का नाम हटाए जाने के बाद अब प्रवासी नागरिकों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा है कि प्रवासियों पर ध्यान केंद्रित करे ताकि पूर्ण पोलियो उन्मूलन सुनिश्चित किया जा सके।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds